वैचारिक लेख

इन खेल अकादमियों को अधिकतर पूर्व ओलंपियन चला रहे हैं और यहां से अच्छे खेल परिणाम भी मिल रहे हैं। इन अकादमियों में जो विशेष है, वह यह है कि यहां उच्च क्षमता वाला प्रशिक्षक लगातार उपलब्ध है। हिमाचल प्रदेश के पास आज विभिन्न खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड तैयार हैं। वहां

सुबह-सुबह को बुलाया था मुख्यमंत्री ने, बोले-‘देखो हम सड़कें चौड़ी कर रहे हैं। आवागमन सुविधाजनक होता जा रहा है।’ मैंने कहा-‘सड़कें ही क्यों, पुल बन रहे हैं और नए-नए फ्लाई ओवर। शहर को आपने चमाचम कर दिया है। बिजली अबाधित है। थोड़ा सा गांवों पर भी ध्यान दें तो अगले चुनाव में नौका आसानी से

हिरण दौड़ते वक्त अक्सर पीछे मुड़-मुड़कर देखता रहता है कि शेर कहां है। इससे उसकी गति कम हो जाती है और शेर थोड़ा और पास आ जाता है। अब शेर पास आता दिखा तो हिरण का आत्मविश्वास और कम हो जाता है, उससे उसकी गति पर और भी ज्यादा फर्क पड़ता है। आत्मविश्वास कम था,

लाजिमी है देश की स्वतत्रंता की 75वीं वर्षगांठ को ‘आजादी अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाए जाने तथा आज़ाद हिंद सरकार के स्थापना दिवस के अवसर पर इतिहास के पन्नों में गुमनाम आज़ाद हिंद फौज के उन रणबांकुरों को याद किया जाए जिनके शिद्दत भरे संघर्ष के बल पर ही मुल्क में आज़ादी के इंकलाब

अपने यहां आज भी औरतें जैसा पति हो, उसके साथ अंत तक निवाह लेने में विश्वास रखती हैं। तीन तलाक तो आज गैर-कानूनी घोषित हुआ, हिंदू कोड बिल तो न जाने कब का पास हो चुका है, लेकिन औरतें हैं कि आज भी अपने कंधों पर शादी के मुर्दा संस्थान को ढोए जा रही हैं।

कोरोना काल के बाद से उच्च शिक्षा से जुड़े छात्रों और अध्यापकों के लिए ई-कंटेंट का महत्त्व बहुत अधिक हो गया है। देश के अनेक राज्यों में अनेक विश्वविद्यालयों और अनेक कॉलेजों ने ई-कंटेंट को विकसित करके छात्रों को उपलब्ध करने की ओर ध्यान नहीं दिया है। मध्य प्रदेश ने इसकी शुरुआत की है। अन्य

पौंग बांध विस्थापित ऐसे हालात में अपने आपको दशकों से ठगा महसूस कर रहे हैं। एक तो उपजाऊ भूमि गंवा चुके हैं, ऊपर से इसके बदले अभी तक कुछ हासिल नहीं कर पाए… उपचुनाव फतेहपुर की वेला पर भी इस हल्के से हजारों पौंग बांध विस्थापितों का मुद्दा गायब है। नेतागण एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने

अरली इन द मॉर्निंग अपने परम मित्र का फोन आया तो मैं चाय के साथ उसे भी कंसीव करने लगा । मत पूछो, उस वक्त उनकी आवाज में कितने गजब का दम और दंभ था। मेरे चाय के गिलास के साथ साथ फोन उठाते ही मुझ पर पिल्लते बोले, ‘हाय बंधु! क्या कर रहे हो?’

जरूरत इस बात की है कि लंबी दूरी की उड़ानों को और सरल बनाया जाए। लंदन में आप हवाई जहाज के उड़ने के मात्र 15 मिनट पहले हवाई अड्डे पहुंच कर हवाई जहाज में प्रवेश कर सकते हैं, जबकि अपने यहां सिक्योरिटी इत्यादि में 1-2 घंटा लग जाना मामूली बात है। इसलिए सरकार को चाहिए