वैचारिक लेख

आज विभाग के पास प्राथमिक पाठशालाओं में बीएड, एमएड, एम. फिल व पीएचडी अध्यापक भी हैं, जिनके पास प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने का अनुभव भी है। उन्हें जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में नए अध्यापकों को तैयार करने के लिए नियुक्त किया जा सकता है। प्रत्येक पाठशाला में कक्षावार अध्यापक होने के साथ-साथ नर्सरी कक्षाओं

सावन के महीने में हमारी देवभूमि में लगने वाले पारंपरिक मेले तथा मंदिरों की भीड़ पिछले बरस की तरह इस बार भी कोरोना की ग्रास बन चुकी है। इस महीने अत्यधिक बरसात से होने वाली हरियाली से हर खेत, खलियान, रास्ते, गलियां बड़े-बड़े घास एवं झाडि़यों से ढक जाते हैं। जमीन के अंदर पानी रिसने

राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए कई वर्ष समाज से कट कर खिलाड़ी को कठिन परिश्रम करना पड़ता है। इस तरह वह पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक व आर्थिक रूप से भी पिछड़ जाता है। इसलिए ही उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक विजेता खिलाडि़यों को काफी विचार-विमर्श के बाद ही खेल आरक्षण दिया गया है।

महाराजा कॉलेज, छतरपुर के प्रोफेसर एसके छारी के शोध से पता चलता है कि इन्हीं जंगलों से लगे पहाड़ों पर आज भी शैल चित्र विद्यमान हैं जो आदिमानव कालीन सभ्यता को बयां करते हैं। दरअसल बक्सवाहा के जंगल एक ऐसे फेफड़े हैं जो बुंदेलखंड को सांसें प्रदान करते हैं। इनकी कटाई बुंदेलखंड में मानवता को

रहीम दास जी की बात मानकर मैं चार साल से चुप बैठा हुआ था। लेकिन अब मुझे लग रहा है कि चुप बैठना घाटे का सौदा है। रहीम दास जी को अब कन्टीन्यू किया तो न मैं घर का रहूंगा न घाट का, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और सारे ही राजनीतिक दल लोकलुभावन वातावरण बना

इसका मतलब है कि हमारे रिश्तों में, हमारी पसंद-नापसंद पर निर्भर करता है कि हम किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा सामने लाए गए किसी नए तथ्य को स्वीकार करेंगे या नहीं करेंगे। सच यही है कि अक्सर तथ्य हमारे विचार नहीं बदलते, बल्कि किसी व्यक्ति पर हमारा विश्वास यह तय करता है कि हम अपने विचार

तिलक ने एक ऐसा काम किया जिसने उन्हें अमरत्व प्रदान किया है। वह काम है उनके द्वारा लिखित ‘गीता रहस्य’। इस ग्रंथ की रचना उन्होंने जेल में की थी। यह ग्रंथ उनकी महान प्रतिभा का द्योतक है। तिलक के व्यक्तित्व के दो पहलू थे। एक ओर उनके क्रांतिकारी विचार थे तो दूसरी ओर सामाजिक सुधारों

भारतीय रेलों की महिमा अपरंपार है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी रेल व्यवस्था कहा जाता है, क्योंकि इस देश की लंबाई-चौड़ाई का अंत कहीं नज़र नहीं आता। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हज़ारों किलोमीटर की यात्रा प्रतिदिन कांपते और कराहते भारतीय रेलें पूरी कर लेती हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें दूर

कोविड-19 से जुड़े प्रतिदिन के मामलों में धीमी कमी देश के लिए यह संकेत है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यदि हम लोग कोविड से जुड़े नियमों का अनुपालन नहीं करते तो स्थिति बिगड़ सकती है और कोरोना की संभावित तीसरी लहर देश के लिए फिर कठिन स्थिति पैदा कर सकती है… भारत में