हिमाचल फोरम

हमीरपुर — अरुणा राम चंद्र शानवाग की मित्र की ओर से इच्छा मृत्यु के लिए दायर किए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करने पर हमीरपुर के वकालत मास्टरों की अपनी-अपनी राय है। कुछ अधिवक्ताआंे ने जहां इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं कुछ ने विरोध भी किया है। अधिवक्ताआंे का मानना है

कुल्लू — गत 37 वर्षों से बेहोशी की हालत में पड़ी नर्स अरुणा को यदि सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी होती, तो भविष्य में सभी शारीरिक व मानसिक रूप से रोगी भी इच्छा मृत्यु के लिए आवेदन करने लगते। यह कहना है कुल्लू के वरिष्ठ अधिवक्ता चुनी लाल शर्मा का, जो

मंडी — 37 वर्षों से बेहोशी की हालत पड़ी नर्स अरुणा को इच्छा मृत्यु देने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के निर्णय को मंडी के अधिवक्ताओं ने सही ठहराया है। मंडी के अधिवक्ताओं की नजर में अरुणा की दोस्त द्वारा दायर की याचिका मानवीय भावनाओं का एक पहलु है, लेकिन कोर्ट