संपादकीय

कश्मीर  की स्वायत्तता एक बार फिर मुद्दा बनी है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने सर्वदलीय बैठक में कश्मीर की स्वायत्तता का जिस तरह आश्वासन दिया है, उसके आशय क्या हैं, यह राजनीतिक दल ही नहीं, देश की अखंडता के समर्थक भी जानना चाहेंगे। स्वायत्तता का अर्थ क्या यह है कि कश्मीर को ‘खुदमुख्तार’ घोषित कर

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कश्मीर पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में जिन मुद्दों को उठाया है, उनसे कश्मीर को लेकर उनकी वास्तविक चिंता उजागर होती है। प्रधानमंत्री ने कश्मीर समस्या का राजनीतिक समाधान खोजने की जरूरत पर जोर देने के अलावा कश्मीर में हिंसा के चलते युवाओं को अलगाववादियों के चक्रव्यूह से निकालने का संकल्प

हिमाचल में डेढ़ सौ स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति से विभागीय दक्षता में बढ़ोतरी होगी। मंत्रिमंडल के इस फैसले का दूरगामी असर होगा, खासकर जहां पेशेवर जरूरतें दिखाई दे रही हों, वहां नियुक्तियों के पैमाने हमेशा लबालब चाहिएं। आज की तारीख में स्वास्थ्य विभाग के सरकारी लक्ष्य, विभागीय कसौटियों के आगे ही कमजोर पड़ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की ताजा बैठक में जिन मुद्दों पर विचार किया गया है, उनमें भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने वाले लोगों को हिफाजत के लिए कानून बनाने के प्रस्ताव खास मायने रखता है। सरकार ने इस मकसद से तैयार किए गए एक विधेयक को मंजूरी दे कर इस ओर अपने ठोस संकल्प का परिचय दिया

लालगढ़ में माओवादियों की छाया में ममता बनर्जी। नालागढ़ में ही ममता की रैली में उमड़ा जन सैलाब। लालगढ़ में स्वामी अग्निवेश और मेधा पाटकर, जो तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं। लालगढ़ में नक्सलियों के बड़े नेता आजाद की मुठभेड़ी हत्या की न्यायिक जांच की मांग के जरिए ममता की पैरोकारी और

लेह में बादल फटने के कारण मची तबाही के बाद भी अभी यह तय नहीं है कि इस आपदा ने कितने लोगों की जान ली और कितने अभी तक मलबे में फंसे हैं। अब तक जहां 170 शवों को बरामद किया जा चुका है, वहीं 600 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका व्यक्त 

यह मसला किसी टाउन हाल के हस्तांतरण का नहीं है, बल्कि यह वह पैमाना है जहां हिमाचली सृजन के सारे पहलू फट जाते हैं। मंडी स्थित टाउन हाल किसकी बपौती है और अगर कला के प्रति यही दस्तूर है, तो हिमाचल में सांस्कृतिक उत्सव मनाने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होता। दरअसल मंडी के टाउन