संपादकीय

कोरोना वायरस का आतंक और खौफ  तो जारी है, लेकिन संक्रमित मरीज को कई स्तरों पर विरोधाभास, अंतर्विरोध झेलने पड़ रहे हैं। बेचारा मरीज भ्रमित है। उसके लिए सभी डॉक्टर ‘भगवान’ के ही रूप हैं, क्योंकि वे ही संक्रमण से निजात दिला सकते हैं और अंततः जीवन-दान तय कर सकते हैं। चिकित्सा और कोविड के

अदालती आईने में हिमाचल की सुशासन पद्धति के रिसाव स्पष्ट हैं कि किस तरह सरकारी अधिकारी अपनी रूह का सौदा करने का भी कानूनी हक चाहते हैं। मामला एक ऐसे डाक्टर का है जो इस जुगाड़ में उच्च न्यायालय पहुंच गया कि कानूनी राहत के तर्क परवान चढ़ कर यह व्यवस्था कर दें, ताकि उसे

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर भी तय है। उन्होंने ‘आसार’ या ‘संभावना’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि यह भी चेतावनी दी कि तीसरी लहर बहुत तेजी से आ सकती है और उसे टाला नहीं जा सकता। वैज्ञानिक सलाहकार ने कोरोना

अभी तो ‘दीदी’ के ऐतिहासिक जनादेश के विश्लेषण किए जा रहे थे। उन्हें विपक्ष की लामबंदी का चेहरा भी माना जाने लगा था। उनकी चुनावी जीत में ‘भावी प्रधानमंत्री’ के बिम्ब भी दिखने लगे थे। यकीनन ममता बनर्जी की चुनावी जीत बहुत बड़ी है, लेकिन उसके भीतर दबी-छिपी मंशाएं विध्वंसकारी हैं। जनादेश के साथ ही

कोरे कागज पर लिखी हिदायतें फिर से चमक रही हैं, भले ही इस बार ‘लॉकडाउन’ का अंदेशा हामी भरे या न भरे, हिमाचल के दिन और रात अब गहन कर्फ्यू के पर्दे में रहेंगे। बढ़ते कोविड मामलों के सूत्रधार बने हिमाचल को अब औपचारिक व व्यावहारिक हिदायतें हैं ताकि भीड़ और आयोजनों के सार्वजनिक प्रदर्शन

पूर्ण लॉकडाउन के पक्ष में आ रहीं आवाजों के बीच निजी क्षेत्र के मंसूबों को कितना पढ़ा जाए। कोरोना से निपटने का पिछली बार एक पक्ष था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। हर पक्ष का एक विपक्ष खड़ा हो रहा है, तो कहीं बेचैनी है, तो कहीं मजबूरियों से आजिज हकीकत दरपेश है। प्रदेश

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ  इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला को अचानक ही, सपरिवार, लंदन जाना पड़ा, तो यह कोई सहज और सपाट घटनाक्रम नहीं है। घुमक्कड़ी करने का यह कोई वक्त नहीं है। कमोबेश कोरोना वायरस के आपदाकाल में यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। सीरम परिजनों ने न तो पलायन किया है और न ही

यहां आंखों देखी कहानी फरेब कर रही या सच का कफन पहने मर गए लोग। आंकड़ों के घोड़े को दफन करने वाले, कोरोना की लहरों से कब तक छुपे बैठेंगे। कर्म और कर्मठता के तमाम पैबंदों के नीचे मानवता के सामने डूबते चरित्र की विकराल परिस्थिति अब हिमाचल में भी देखने को मिल रही। कचरे

दो मई आई और चली भी गई, लेकिन पश्चिम बंगाल में ‘दीदी’ की सत्ता ही बरकरार रही। लगातार तीसरी बार ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को जनादेश हासिल हुआ-प्रचंड और ऐतिहासिक! 2016 में 211 सीटों का जनादेश था, लेकिन अब 2021 में उसे भी पार करते हुए 213 सीटों तक पहुंच गया, जबकि 200