पाठकों के पत्र

-रूप सिंह नेगी, सोलन कोरोना महामारी की दूसरी लहर के लिए मद्रास हाई कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना उचित माना जा सकता है। इस लहर के लिए राजनीतिक दलों की भी  जि़म्मेदारी तय करने की जरूरत होनी चाहिए जिन्होंने राज्यों में ताबड़तोड़ रैलियां की हैं और भीड़ बढ़ाने के लिए कथित तौर से

-नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, मंडी अमरीका में बसे प्रवासी भारतीय जय चौधरी हिमाचल प्रदेश के गांव पनोह, जिला ऊना के हैं। उन्होंने भारत को लगभग 22 करोड़ रुपए का दान दिया है। यह दूसरों के लिए प्रेरणा है। इस पवित्र कार्य की सराहना की जानी चाहिए। कोरोना महामारी बहुत ज़्यादा फैल गई है। हमारे देश

-राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा मद्रास हाइकोर्ट ने कोरोना की अनदेखी करने के आरोप में चुनाव आयोग को बिल्कुल सही फटकार लगाई है। जब सभी जानते हैं कि हमारे देश में अभी कोरोना हारा नहीं है, फिर चुनाव रैलियों को देखकर मौन क्यों रहा? अगर उसने राजनीतिक दलों को कोरोना नियमों के आदेश दिए थे,

-नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, मंडी देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है, लेकिन यह खराब तत्वों द्वारा पैदा की गई स्थिति है। काले बाजार के कारोबारी इस जटिल व्यवसाय में शामिल हो गए हैं, क्योंकि अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी मांग है। जब मांग बढ़ जाती है तो वे सक्रिय हो जाते हैं। हमारे

-कुलतार चंद गुलेरिया, धर्मशाला वर्तमान में किसी भी पटवारखाने के बाहर ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगा है कि पटवारी द्वारा या विभाग द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए कितने रुपए लगते हैं। पटवारी अपनी मनमर्ज़ी  से जितना चाहे, मांग लेते हैं। कोई भी सूचना बोर्ड न होने से जनता ज़रूरत से ज़्यादा पैसे दे

-राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा परिवर्तन प्रकृति का नियम है। दिन के बाद रात और रात के बाद दिन आता है। इसी तरह हमारी जिंदगी में सुख और दुख का दौर भी आता-जाता रहता है। रात कितनी भी अंधकार और लंबी क्यों न हो, लेकिन तय समय में दिन जरूर होता है। हमें अपने सुखद

भारत में कई राज्यों में ऑक्सीजन की उच्च मांग के संदर्भ में, खासकर महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़ व हिमाचल प्रदेश आदि में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति करना बहुत महत्त्वपूर्ण है। महाराष्ट्र में कोविड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और मरने वालों की संख्या भी बहुत अधिक है। सरकार ने कई प्रतिबंधों को लागू किया

-राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा हम जिस थाली में खाएं उसी में छेद करना शुरू कर दें तो यह हमारी सबसे बड़ी नासमझी नहीं होगी तो और क्या होगा? पृथ्वी हमें निस्वार्थ भाव से जीने के लिए सब कुछ देती है, लेकिन हम नासमझी बरतते हुए इसे ही अपने स्वार्थ के लिए नुकसान पहुंचाने में

-नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, मंडी भारत में कोरोना वायरस का एक बड़ा उछाल है। यह अब नियंत्रण से बाहर लग रहा है। लॉकडाउन अब संभव नहीं है क्योंकि इससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और यह बेरोजगारी तथा भुखमरी पैदा करेगा। इसलिए हमें कोविड और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाना होगा। इसके लिए