पाठकों के पत्र

समाचारों के अनुसार गंगा नदी के पवित्र जल में 50 शव बहते हुए पाए गए हैं। यह सही है कि दाह या दफन संस्कार के लिए परिवार के सदस्यों को 5 से 6 घंटे तक श्मशान या  कब्रिस्तान में इंतजार करना पड़ता है और शवों को जलाने के लिए सूखी लकड़ी तथा खाली जमीन की

-राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा अगर इनसान ने कुदरत से छेड़छाड़ बंद नहीं की और पर्यावरण को संभालने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई तो क्या भविष्य में कुदरत कहर बरपा कर प्राणी जाति के लिए और विकट मुसीबतें नहीं पैदा करेगी? इनसान ने विज्ञान में इतनी तरक्की कर ली है कि वह भूल गया है

भले ही कुछ देरी से ही सही लेकिन, हिमाचल सरकार ने प्रदेश में जो लॉकडाउन लगाया है, उसे स्वागत योग्य माना जाना  चाहिए। सभी नागरिको से उम्मीद की जाती है कि वह सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन कर लॉकडाउन को सफल बनाने में मदद करेंगे ताकि इस राक्षस रूपी कोरोना का अंत हो सके। दुखद

यह स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच एक विरोधाभास है कि वायरस की तीसरी लहर आएगी या नहीं। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार अगर हम चिकित्सा उपकरणों जैसे वेंटिलेटर, आक्सीजन, बेड और अस्थायी अस्पतालों की उचित व्यवस्था करते हैं और  मास्क के उचित उपयोग, दो मीटर की दूरी, हाथ धोने, सेनेटाइजर का उपयोग आदि सावधानियां रखेंगे, तो  तीसरी

जब कोरोना की पहली लहर हमारे देश में चलने ही लगी थी तो केंद्र और राज्य सरकारों ने संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया था और प्रवासी मजदूरों-कामगारों की अन-धन और आर्थिक मदद करने की भी भरपूर कोशिश की थी। लेकिन स्थानीय निकाय अर्थात कुछ भ्रष्ट सांसदों, विधायकों, पार्षदों और अन्य छुटपुट प्रधानों की बदौलत सरकारों की

‘क्या तुमने ढपोर शंख की कहानी सुनी है?’ छप्पर वाले बाबा ने हमें बुला कर पूछा। ‘जनाब, यहां कहानियां सुनने की फुर्सत किसके पास है? यहां तो रोज़ी-रोटी प्राप्त करने के नाकाम सपने देखते-देखते ही दिन पर दिन, बरस पर बरस कट गए। अब लीजिए नए सपनों की बारात सजा कर चंद दूल्हे हमारी नगरी

हिमाचल प्रदेश में कोविड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले वर्ष में यहां बहुत कम मामले थे। लेकिन अभी अप्रैल के महीने में वायरस का एक बड़ा उछाल आया है और यह लगातार बढ़ता जा रहा है। यह लोगों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। शासन ने इसे नियंत्रित करने के

हाल ही में जो पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आए, इन पर सभी के अपने-अपने विचार हो सकते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में टीएमसी को शानदार जीत मिलना भाजपा के लिए जोर का झटका है। भाजपा को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए तो और भी

-नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, मंडी भारत को कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना करना पड़ रहा है। यह आरोपों का समय नहीं है। वायरस के खिलाफ  युद्ध की तरह लड़ें। जैसे हम युद्ध की अवधि में एकजुट होते हैं और दुश्मन के खिलाफ साहसपूर्वक लड़ते हैं, यह हमारे सैनिकों का मनोबल बढ़ाता है। ठीक