आस्था

श्री सूक्त महालक्ष्मी की आराधना का वैदिक और प्रभावशाली मंत्र है।  इसका उल्लेख ऋग्वेद में हुआ है। ऐसी मान्यता है कि श्रीसूक्त की साधना कभी भी विफल नहीं होती। दीपावली के दिन श्रीसूक्त का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह दरिद्रता और नैराश्य का नाश करता है।  इस सूक्त की ऋ चाओं में

कृष्ण जैसी चेतना के जन्म के लिए सभी समय, सभी काल, सभी परिस्थितियां काम की हो सकती हैं। कोई काल, कोई परिस्थिति कृष्ण जैसी चेतना के पैदा होने का कारण नहीं होती है। हम सदा ऐसा सोचते रहे हैं कि कृष्ण शायद इसलिए पैदा होते हैं कि युग बहुत बुरा है, इसलिए पैदा होते हैं

किसी भी प्रकार का अंधेरा कैसे दूर होता है? अंधेरे से लड़कर नहीं। तरह-तरह के उपाय करके नहीं। बस एक छोटी सी युक्ति से अंधेरा दूर हो जाता है और वह छोटी सी युक्ति है-उजाला। उजाला कर दो, उजाला ले आओ, अंधेरा खुद दूर हो जाएगा। प्रातः सूर्य के आते ही रात का अंधेरा कहां

संसार में सभी भक्तजनों ने मानवीय भावनाओं को ही उजागर किया है और वास्तव में ऐसी ही भावनाओं को विस्तार मिलना चाहिए।  दास की अभिलाषा भी यही है कि इन्हीं भावनाओं को बढ़ावा मिले। इसी प्रकार इनसान को यही आवाज निरंतर दी जा रही है कि इनसान! तूने ऐसा कर्म करना है कि जिस से

एक बात मैं तुम्हें बताऊंगा। इसे निंदा मत समझना। तुम लोगों को प्रशिक्षित करते हो, खाना, कपड़ा और वेतन देते हो सो काहे के लिए, क्या इसलिए कि मेरे देश में आकर मेरे पूर्वजों, मेरे धर्म और मेरी सब चीजों को गालियां दें और निंदा करें? व मंदिर के निकट जाएं और कहें ओ मूर्तिपूजकों!