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-गतांक से आगे… विचित्र-रत्न-पृथिवी-कल्प-शाखि-तल-स्थिता। रत्न-द्वीप-स्फुरद-रक्त-सिंहासन-विलासिनी।। 111।। षट्-चक्र-भेदन-करी परमानन्द-रूपिणी। सहस्र-दल-पद्यान्तश्चन्द्र-मण्डल-वर्तिनी।। 112।। ब्रह्म-रूप-शिव-क्रोड-नाना-सुख-विलासिनी। हर-विष्णु-विरिंचिन्द्र-ग्रह-नायक-सेविता।। 113।। शिवा शैवा च रुद्राणी तथैव शिव-वादिनी। मातंगिनी श्रीमती च तथैवानन्द-मेखला।। 114।। डाकिनी योगिनी चैव तथोपयोगिनी मता। माहेश्वरी वैष्णवी च भ्रामरी शिव-रूपिणी।। 115।। अलम्बुषा वेगवती क्रोध-रूपा सु-मेखला। गान्धारी हस्ति-जिह्वा च इडा चैव शुभंकरी।। 116।। पिंगला ब्रह्म-सूत्री च सुषुम्णा चैव गन्धिनी। आत्म-योनिर्ब्रह्म-योनिर्जगद-योनिरयोनिजा।। 117।। भग-रूपा

हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी नगर से 50 किमी. दूर सरकाघाट तहसील से 25 किमी. की दूरी पर पिंगला नामक स्थान पर भगवान लक्ष्मी नारायण के प्राचीन मंदिर भव्य और अद्वितीय शैली में छटा बिखेरे हुए है। यह गुंबदीय शैली का भव्य मंदिर तथा भगवान नारायण विष्णु एवं माता लक्ष्मी तथा विष्णु वाहन गरुड़ की

भारत की विविधता में एकता के रंग यहां के उत्सवों व पर्वों में बड़ी खूबसूरती से देखे जाते हैं। एक ही धर्म में अलग-अलग क्षेत्रों में इतनी खूबसूरत सांस्कृतिक परंपराएं हैं। जिस तरह बंगाल में दुर्गा पूजा की धूम होती है, उत्तरी भारत में नवरात्र की उसी प्रकार महाराष्ट्र में गणोशोत्सव बड़े उत्साह से मनाया

ऐसा अनुभव हो रहा था जैसे उसे काफी पीड़ा हो रही है। रानी पानी लेने भागी तो सामने भयानक सूरत वाला आदमी खड़ा था। नुकीले दांतों से बड़ी-बड़ी आंखों से उसे घूर रहा था, सहसा ही वह आकृति सामने से ओझल हो गई। रानी ने आश्वस्त होकर फिर देखा, पर वहां कोई नहीं था। रानी

मनुष्य की कामना के अनुसार ही तारा को तारिणी, तरला, त्रिरूपा, तरणी, रजोरूपा, तमोरूपा, महामाया, कालस्वरूपा और परानंदा आदि नामों से पुकारा जाता है। सर्वकामया हेतु इनकी तंत्र साधना भी की जाती है। यह साधना किसी शुभ मुहूर्त, पर्वकाल, कालरात्रि, महारात्रि, होली, दीवाली, शिव चतुर्दशी अथवा ग्रहणकालादि में प्रारंभ की जा सकती है। इसके लिए

श्रीश्री रवि शंकर प्रार्थना यह है कि सत्य का चेहरा एक पर्दे से ढका हुआ है। कृपया उस पर्दे को उठाइए ताकि मैं सत्य को देख सकूं । जीवन में हम बाह्या आवरण में फंसे रह जाते हैं। इस अद्भुत उपहार को हमने अभी तक खोला भी नहीं है। यदि मैं अपने आप सत्य को

सौंदर्य के क्षेत्र में शहनाज हुसैन एक बड़ी शख्सियत हैं। सौंदर्य के भीतर उनके जीवन संघर्ष की एक लंबी गाथा है। हर किसी के लिए प्रेरणा का काम करने वाला उनका जीवन-वृत्त वास्तव में खुद को संवारने की यात्रा सरीखा भी है। शहनाज हुसैन की बेटी नीलोफर करीमबॉय ने अपनी मां को समर्पित करते हुए

स्वामी विवेकानंद गतांक से आगे… अधिकांश यूरोपीय विद्वानों ने तो उस समय संस्कृत भाषा का नाम ही नहीं सुना था इससे अर्थप्राप्ति की बात तो दूर रही। मैंने पहले ही कहा था कि संस्कृत भाषा का विद्वान होकर अथोपार्जन पश्चिम देशों में अभी एक असंभव कार्य है। फिर भी हमारे इस युवक को संस्कृत सीखने

बाबा हरदेव गतांक से आगे… कितनी तबाहियां हो रही हैं, लेकिन आग बढ़ती ही जाती है लेकिन जहां पर भी कोई झील या तालाब पानी से भरा हुआ आ गया है, उससे आगे आग नहीं जा सकती। आग वहीं किनारे पर रुक जाया करती है।  इसी तरह से चारों तरफ इनसान एक दूसरे से टकराता