अपनी माटी

क्लस्टर बनाकर खेती करने वाले किसानों को मार्केट भी मिलेगी औषधीय पौधे उगाने वाले किसानों के लिए राहत भरा समाचार है। इन किसानों को अब अपनी पैदावार बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इन्हें मार्केट भी मुहैया करवाई जाएगी। पढि़ए बिलासपुर से यह खबर… बिलासपुर जिला में ऐसे सैकड़ों किसान हैं, जो आयुर्वेद विभाग के

आठ साल पहले कारपोरेट की नौकरी छोड़ लौटे भाइयों के फिश पौंड में जोरदार पैदावार साढ़े पांच किलो तक है एक-एक मछली, रोहू, कतला और मृगल का हो रहा उत्पादन राज्य में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने कई सकारात्मक कदम उठाए हैं, जिनके काफी अच्छे परिणाम मिले हैं और मत्स्य

क्या मिट्टी के बिना खेती की कल्पना की जा सकती है। जी हां, ऐसा अब संभव हो गया है। इस तकनीक का नाम है हाइड्रोपोनिक्स। आने वाले दिनों में यह बेहद लोकप्रिय हो सकती है । पेश है यह खबर… नई तकनीक में पानी की खपत भी कम हम अकसर यह सुनते हैं कि खेती

अपनी माटी के पास सैकड़ों किसानों ने जीवामृत बनाने की विधि पूछी थी। इस पर हमारी टीम ने नौणी यूनिवर्सिटी का दौरा किया, जहां एक्सपर्ट ने कई अहम टिप्स दिए। पेश है यह खास खबर… नौणी यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट ने दिए टिप्स देशभर में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही

हिमाचल स्टेट को-आपरेटिव मार्केटिंग एंड कंज्यूमर फेडरेशन यानी हिमफेड की स्थापना 1952 में हुई थी। सरकार के इस उपक्रम से 900 से ज्यादा सहकारी सभाएं जुड़ी हुई हैं। हिमफेड किसानों-बागबानों के लिए कई तरह के काम कर रहा है। आइए जानते हैं हिमफेड के एमडी केके शर्मा से। पेश है यह खास खबर… इस बार

हिमाचल में सेब की आर्थिकी चार हजार करोड़ तक आंकी गई है। इस बड़े सेक्टर में बर्फ का बड़ा रोल रहता है, लेकिन इस बार हिमपात कम हुआ है। पेश है यह खबर … इस बार पहाड़ से रूठी बर्फ, चिलिंग आवर्ज पर संकट हिमाचल में सेब प्रमुख फसलों में माना जाता है। इस फसल

सच मानिए, कश्मीरी आतंकवाद ने केसर की खुशबू को भी कैद कर रखा था। धारा 370 हटने के करीब डेढ़ साल बाद अब केसर की सुगंध भी आजाद होने लगी है, क्योंकि आखिरकार टेररिस्ट टैक्स अलविदा हो गया है। तीन दशक में पहली बार दिल्ली समेत दीगर सूबों के केसर कारोबारी घाटी तक जाकर केसर के सौदे कर रहे हैं। टेररिस्ट टैक्स ...11

यूनिवर्सिटी द्वारा 20 जनवरी तक बंटेंगे पौधे नौणी यूनिवर्सिटी में समय समय पर बागबानों को पौधे बांटे जाते हैं। इस बार भी पौधे बांटने का दौर शुरू हो गया है। बागबानों को टेंशन से बचाने के लिए विशेष योजना के तहत पौधे बांटे जा रहे हैं। देखिए यह रिपोर्ट … नौणी यूनिवर्सिटी में बागबानों को

* गद्दी समुदाय के पाले जाने वाले श्वान का होगा संरक्षण * कृषि विश्वविद्यालय ने की अनूठी पहल पालमपुर। विलुप्ता के मुहाने पर जा पहुंचे हिमाचली श्वान (गद्दी समुदाय द्वारा पाले जाने वाले श्वान) के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए वैज्ञानिक पहल की जाएगी। पहली बार इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। हिमाचल