कोरोना गांवों की ओर!

By: May 13th, 2021 12:02 am

बेशक हमारे देश में कोरोना वायरस के मामले घट रहे हैं, लेकिन अभी संक्रमण में स्थिरता के आसार नहीं हैं। कोविड अब भी मौजूद है और स्थिरता की अंतिम स्थिति का इंतज़ार करना पड़ेगा। हालांकि भारत सरकार का विश्लेषण है कि 18 राज्यों में स्थिरता के रुझान स्पष्ट होने लगे हैं, लेकिन कोई दावा नहीं किया गया है। अब भी देश के 26 राज्यों में संक्रमण दर 15 फीसदी से अधिक है। 533 जिले ऐसे हैं, जहां संक्रमण दर औसतन 10 फीसदी से अधिक दर्ज की जा रही है। जाहिर है कि कोरोना संक्रमण लगातार फैल रहा है। देश में कुल 718 जिले हैं। एक और चिंतित आयाम सामने आया है कि बेशक शहरों में संक्रमित आंकड़े कम हो रहे हैं, लेकिन गांवों और कस्बों में कोरोना अब भी फैल रहा है। छत्तीसगढ़ की तस्वीर डराने वाली है, जहां करीब 89 फीसदी संक्रमित मामले ग्रामीण इलाकों से आए हैं। इसके अलावा हिमाचल, बिहार, ओडिशा, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, उप्र और जम्मू-कश्मीर के गांवों में 65 फीसदी से 79 फीसदी तक मामले दर्ज किए जाते रहे हैं और यह रुझान जारी है। यकीनन महाराष्ट्र, दिल्ली, उप्र आदि के शहरों में, बीते कुछ दिनों से, कोविड के मरीज घटे हैं। कम टेस्टिंग के बावजूद संक्रमण-दर बढ़ी है। देश में मंगलवार को 19 लाख से ज्यादा टेस्ट किए गए हैं। यह संख्या भी कम नहीं है।

 लॉकडाउन, कर्फ्यू और अन्य पाबंदियां बुनियादी कारण हो सकते हैं कि संक्रमण को फैलने की वजह और जरिया कम मिल पा रहे हैं, लेकिन जिला स्तरीय डाटा स्पष्ट कर रहा है कि कस्बों और ग्रामीण इलाकों में कोविड लगातार फैल रहा है। देश के 24 में से 13 राज्यों में शहरों से अधिक संक्रमित मामले गांवों में मिले हैं। अन्य 11 राज्यों में भी गांवों में कोविड का विस्तार जारी है। यह स्थिति तब है, जब अधिकतर गांवों में टे्रसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट की अपेक्षित सुविधाएं नगण्य हैं। अच्छे अस्पतालों की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती, बल्कि झोलाछापों की दुकानें फल-फूल रही हैं। पेरासिटामोल सरीखी दवा भी बेहद कम है। झोलाछाप पाउडर पीस कर मरीजों को जो भी दे रहे हैं, उसे स्वीकार करना ग्रामीणों की विवशता है। गांवों में कोविड के विस्तार की ख़बरें सुर्खियां बनी हैं, तो सरकारें सक्रिय हुई हैं। ग्रामीण इलाकों में मौतें भी खूब हो रही हैं, क्योंकि ग्रामीणों को कोरोना वायरस की पर्याप्त जागरूकता नहीं है। वे उसे ‘रहस्यमयी बुखार’ करार दे रहे हैं। ग्रामीण अब भी मलेरिया, टायफाइड आदि तक ही सिमटे हैं। हैरानी से सवाल करते हैं कि न जाने कैसा बुखार है, जो आसपास आने वालों को भी अपनी चपेट में ले लेता है और लोग मरने लगते हैं। गांववाले उस बुखार को कोविड नहीं मान पा रहे हैं।

 यह है भारत में उप्र, मप्र और हरियाणा के गांवों का यथार्थ…! ऐसे कई राज्यों के गांवों से चौंकाने वाले आंकड़े मिल रहे हैं, नतीजतन सरकारें मुग़ालते में न रहें कि कोविड का ‘पीक’ अलग-अलग राज्यों में गुज़र रहा है और कोरोना के मामले घटने लगे हैं। अब भी कोविड के मामले 3.48 लाख रोज़ाना से ज्यादा हैं, लेकिन 3.55 लाख से अधिक मरीज स्वस्थ भी हुए हैं और मंगलवार के हिस्से ही 4200 से ज्यादा मौतें आई हैं। बेशक रोज़ाना का संक्रमण 4.14 लाख से कम हुआ है, लेकिन मौतें लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ इसे चिंताजनक स्थिति मानते हैं। मौजूदा 24 घंटे का आंकड़ा 3.48 लाख भी अत्यधिक है, क्योंकि पिछली लहर में 97,000 से अधिक मामलों पर ‘पीक’ आ गया था। इस बार अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं। सरकार का डाटा भी संदिग्ध है। यदि भारत के गांव कोविड-मुक्त नहीं हो पाए, तो देश की बेहतर कल्पना कैसे की जा सकती है? विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन कहती है कि टेस्टिंग अधिक करो, तो संक्रमण पर उतनी जल्दी ही काबू पाया जा सकता है। भारत इस गाइडलाइन का भी पालन नहीं कर रहा है, क्योंकि सरकार के भीतर की ताकतवर शक्तियों के आदेश हैं कि संक्रमित मरीजों और मौतों के आंकड़े कम किए जाएं। बहरहाल यह स्थिति कहां जाकर थमेगी, फिलहाल कहना मुश्किल है। उसी के बाद व्याख्या की जा सकेगी कि देश में कोविड की हकीकत क्या है?