मुसीबत में मसीहा बने लोग, अंतिम संस्कार भी किया और कटाई भी

By: May 8th, 2021 12:10 am

बागड़ू में कोरोना से मुखिया की मौत और परिवार के पॉजिटिव होने पर ग्रामीणों ने फसल कटाने में की मदद

दिव्य हिमाचल ब्यूरो – धर्मशाला
कोरोना संक्रमण के चलते नाते-रिश्तेदार भी अपने अपनों का साथ या तो छोड़ जा रहे हैं या फिर छोडऩे पर मजबूर हो रहे हैं। ऐसे निर्दयीकाल में कौन किसका सहारा बनेगा, ये बड़ा सवाल बन गया है। वैसे भी आधुनिकता की इस दौड़ में लोग एक दूसरे का सहयोग करने के बजा; अपना देख रहे हैं, वहीं कांगड़ा जिला के शाहपुर क्षेत्र के रैत ब्लॉक की बागड़ू पंचायत में लोगों ने मानवता का परिचय दिया है। दरअसल बागड़ू-नौशहरा के रहने वाले किसान पृथी चंद दो सप्ताह पहले कोरोना की चपेट में आ गए थे। पांच से सात दिन कोरोना से जंग लडऩे के बाद भी वे खुद को नहीं बचा पाए और उनका निधन हो गया। आलम ये था कि उनकी मौत से पहले उनके परिवार के सदस्यों में उनकी धर्मपत्नी, बेटा और बहू भी कोरोना की चपेट में आ चुकी थी। स्थिति इतनी नाजुक थी कि घर वाले भी पृथी चंद का अंतिम संस्कार कर पाने में अक्षम थे, वहीं गांव के ही कुछ लोगों ने आगे बढ़कर पृथी चंद की पार्थिव देह को कोरोना प्रोटोकोल के तहत श्मशानघाट तक पहुंचाया, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

पृथी चंद की मौत के साथ ही सवाल ये खड़ा हो गया कि अब उसके खेतों में खड़ी फसल को कौन काटेगा। कौन घर तक पहुंचाएगा, क्योंकि एक तो खराब मौसम और लगातार बारिश ऊपर से घर-परिवार में मातम और कोरोना का कहर, तीसरा करीब आठ से दस कनाल की जमीन यानी खेतों में खड़ी छह महीने की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई, गेहूं आए दिन बर्बाद होती हुई, नजर आ रही थी। ऐसे में बागड़ू पंचायत के प्रधान प्रकाश चंद व समेत लाहेश्वरी मंदिर कमेटी के सदस्यों चमन लाल व उनके सहयोगियों ने दुख की इस घड़ी में अपना कामकाज छोड़ सबसे पहले इस दुखिया परिवार का सहयोग करने की ठानी और खुद अपने स्तर पर बाकी युवाओं से और गांव के लोगों से आह्वान कर उनकी खेतों में खड़ी बर्बाद होती फसल को काटने का आह्वान किया। उनके इस आह्वान पर कई लोगों ने हामी भर दी और सभी ने एकजुट होकर दिवंगत किसान पृथी चंद के खेतों में जाकर न केवल कटाई का काम शुरू कर दिया, बल्कि उसकी बुहाई समेत घर तक पहुंचाने का भी बीड़ा उठा लिया। कोरोना के कारण बने हालात में बागड़ू पंचायत के प्रधान और मंदिर कमेटी ने पीडि़त परिवार के जख्मों पर मरहम लगाने के साथ समाज की उस परंपरागत व्यवस्था की नींव को फिर से याद दिला दिया है,।

कोरोना से हुई मौत पर बुजुर्ग को कंधा देने से कतरा लोग

पंचरुखी। लदोह गांव में एक बुजुर्ग महिला की कोरोना वायरस के चलते मौत हो गई। इस दौरान बुजुर्ग को कंधा देने के लिए कोई भी आगे नहीं गया, जबकि मृतक महिला का पुत्र भी कोरोना संक्रमित था, जिसके चलते दिक्कतें आईं । पंचायत प्रधान के आगे आने पर कुछ लोग शव जलाने को तैयार हुए। महिला के पुत्र व चार अन्य लोगों ने पीपीई किट पहनकर पूरा अंतिम संस्कार किया।