पीक पर्यटक सीजन, कुल्लू-मनाली में सन्नाटा

By: May 13th, 2021 12:02 am

कोरोना की मार के बाद कारोबार ठप होने पर अब बिकने लगे होटल, करोड़ों के बैंक लोन से परेशान कुल्लू-मनाली के होटल कारोबारी

राजेश शर्मा — मनाली
विश्व विख्यात पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली कौन नहीं आना पसंद करता है, यह सब जानते हैं। वहीं, वर्तमान में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक कुल्लू-मनाली में निजी होटल, कॉटेज, गेस्ट हाउस व होम स्टे करीब अढ़ाई हजार के करीब है। लेकिन कुल्लू-मनाली को अगर ध्यान से निहारें तो यहां हर कदम पर होटल है। हर धन्नासेठ ने यहां होटल, कॉटेज, होम स्टे तैयार किया है। यही नहीं बाहरी राज्यों के बड़े कारोबारियों ने भी कुल्लू-मनाली में अपने आलीशान होटल तैयार किए है। लेकिन कोरोना महामारी के बाद से यहां सबसे अधिक असर इस बार होटल कारोबारियों को पड़ा है। मनाली में अधिक होटल मालिकों ने बाहरी राज्यों के लोगों को होटल लीज पर दिए थे। लेकिन अब लीज खत्म होने के बाद भले ही बाहरी राज्यों के कारोबारियों ने अपने हाथ पीछे कर लिए हो। लेकिन अब अधिकतर होटल मालिकों की हालत इतनी अधिक खस्ता हो चुकी है कि बैंक का लोन देने के चलते होटलों को यहां बेचना पड़ रहा है। इस समय कुल्लू-मनाली के करीब 20 प्रतिशत होटल मालिक ऐसे है। जिन्होंने बाहरी राज्यों से आने वाले बड़े कारोबारियों को होटल बेचना शुरू कर दिया है। ताकि वह बैंक का लोन दे सके। होटल बनाने के लिए बैंक से करोड़ों का लोन लेने के बाद अब कारोबार न चलने के चलते जिन सपनों से होटल तैयार किया था। उन्हें बेचने के लिए मजबूर हो गए है।

कारोबार न चलने के चलते अधिकतर होटलों में ताले जड़े हैं। स्टाफ का खर्च भी इस समय कोई होटल उठा नहीं पा रहा है। जो बुकिंग हुई थी, वह कोरोना कफ्र्यू से पहले ही कैंसल हो गई। होटल मालिक इस समय आर्थिक नुकसान काफी अधिक झेल रहा है। मनाली का अधिकतर कारोबार पर्यटन पर टिका है। ऐसे में पिछले एक साल से पर्यटन कारोबार न होने के चलते लोग परेशान हो गए है। कारोबार न होने से अधिकतर लोग नुकसान होने के चलते डिपरेशन भी जाने लग पड़े है। कुल्लू-मनाली में अनेकों होटल मलिक तो ऐसे हैं, जिनकी रोटी रोटी होटल से ही चलती थी।

वह पूरी तरह से ठप हो जाने के चलते अब मुश्किल उनकी दुगनी हो गई है। होटल जहां बंद है। वहीं, होटल का खर्चा अभी भी उठाना ही पड़ रहा है। इधर, होटल मालिक अनिल कुमार शर्मा, अभिनव, संजय कुमार शर्मा, चमन, बुद् िसिंह ठाकुर, विक्रांत शर्मा, बिनित मनचंदा की माने तो होटल न चलने से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। मई माह में पर्यटन कारोबार पीक सीजन पर होता था। लेकिन इस बार पर्यटन नगरी में सन्नाटा पसरा है। होटलों में कहीं ताले जड़े तो कुछ होटल मालिक होटल बेचने को मजबूर हंै। कारोबार न होने के चलते बैंक का कर्ज रोजाना बढ़ रहा है। ऐसे में होटल बेचने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। मई माह पीक सीजन में सब पर्यटन कारोबारी घर में बैठे है। वहीं, यही हालत आगे भी ऐसी रही तो होटल मालिक भी बेरोजगार हो जाएंगे।