कांगड़ा में अब वैज्ञानिक तरीके से होगी बागबानी

By: May 10th, 2021 12:12 am

प्लाट चिन्हित कर शुरू होगी बेड प्लांटेशन, एचपी शिवा प्रोजेक्ट के तहत 25 हजार बागबानों को मिलेगा लाभ

सिटी रिपोर्टर—धर्मशाला
प्रदेश भर में मई माह के दौरान हो रही बारिश कृषि की फसलों के लिए तो हानिकारक है जबकि फलों के उत्पादन के लिए यह बारिश वरदान की तरह है। प्रदेश के सभी निचले क्षेत्रों में इस दौरान आम समेत अन्य फलों की सेंटिंग हो रही है और इस दौरान हो रही बारिश से बागबानों की भी फलों के अच्छे उत्पादन की उम्मीद जग गई है।

वहीं बागबानी विभाग भी बागबानों के लिए नई सौगात देने जा रहा है। हालांकि कोरोना महामारी के चलते कार्यालयों का काम रुका हुआ है, लेकिन फील्ड का काम कोरोना कफ्र्यू के दौरान भी चल रहा है। प्रदेश के कुछ निचले क्षेत्रों में शुरू किए जा रहे एचपी शिवा प्रोजेक्ट के तहत जिला कांगड़ा में डेमोस्ट्रेशन प्लांट को चिन्हित किया जा रहा है। इस दौरान जिला के सात ब्लॉक भवारना, बैजनाथ, पंचरुखी, लंबागांव, सुलाह, देहरा और परागपुर में जगहों को चिन्हित करके दस हजार हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जाएंगे। क्लस्टर बनाने के बाद उसमें बेड प्लांटेशन की जाएगी। प्लांटेशन की प्रक्रिया में मीठा संतरा और अमरूद के पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए बागबानी विभाग कांगड़ा की ओर से पूरी तैयारी शुरू की जा रही है वहीं 30 से 40 डेमोस्टे्रशन प्लॉट को चिन्हित करने के बाद जुलाई और अगस्त के माह में प्लांटेशन भी शुरू कर दी जाएगी।

क्या कहते हैं बागबानी विभाग के उपनिदेशक
बागबानी विभाग कांगड़ा के उपनिदेशक कमलशील नेगी ने कहा कि प्रोजेक्ट के प्रथम चरण की प्रक्रिया के दौरान जिला के सात ब्लॉक में डेमोस्टे्रशन प्लाट को चिन्हित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जगहों का चयन हो जाने के बाद क्लस्टर बनाकर बेडिंग प्लांटेशन की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में केवल दो फलों मीठे संतरे और अमरूद की प्लांटेशन ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्लांटेशन और फलों के उत्पादन की प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित होगी। इस दौरान ड्रिप इरिगेशन की व्यवस्था की जाएगी। बागबानों को बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वैज्ञानिक पद्धति के साथ ही मल्चिंग और अन्य सभी कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निचले क्षेत्रों में फलों के उत्पादन का प्रतिशत बहुत कम है। लेकिन इस प्रोजेक्ट के माध्यम से नए लक्ष्यों को निर्धारित किया जा सकता है और हिमाचल को फलों का कटोरा पूरी तरह से बनाया जा सकता है।

क्या है एचपी शिवा प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट बागबानी विभाग का बहुत ही महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। प्रदेश के निचले क्षेत्रों में फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रथम चरण में यह प्रदेश के सात जिलों कांगड़ा, हमीरपुर, मंडी, ऊना, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर में डेढ़ करोड़ की लागत क्लस्टर बनाकर शुरू किया जा रहा है। एशियन डिवेलपमेंट बैंक की सहायता से शुरू किए जा रहे प्रोजेक्ट में 25 हजार के करीब बागबानों को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 80 प्रतिशत के खर्च का वहन सरकार की ओर से जबकि 20 प्रतिशत खर्च किसान की ओर से किया जाएगा।