काली-सहस्रनाम

By: May 8th, 2021 12:27 am

-गतांक से आगे…

गृध्र-रूपा शिवा-रूपा चक्रिणी चक्र-रूप-धृक। लिंगाभिधायिनी लिंग-प्रिया लिंग-निवासिनी।। 121।।

लिंगस्था लिंगनी लिंग-रूपिणी लिंग-सुन्दरी। लिंग-गीतिमहा-प्रीता भग-गीतिर्महा-सुखा।। 122।।

लिंग-नाम-सदानंदा भग-नाम सदा-रतिः। लिंग-माला-कंठ-भूषा भग-माला-विभूषणा।। 123।।

भग-लिंगामृत-प्रीता भग-लिंगामृतात्मिका। भग-लिंगार्चन-प्रीता भग-लिंग-स्वरूपिणी।। 124।।

भग-लिंग-स्वरूपा च भग-लिंग-सुखावहा। स्वयम्भू-कुसुम-प्रीता स्वयम्भू-कुसुमार्चिता।। 125।।

स्वयम्भू-पुष्प-प्राणा स्वयम्भू-कुसुमोत्थिता। स्वयम्भू-कुसुम-स्नाता स्वयम्भू-पुष्प-तर्पिता।। 126।।

स्वयम्भू-पुष्प-घटिता स्वयम्भू-पुष्प-धारिणी। स्वयम्भू-पुष्प-तिलका स्वयम्भू-पुष्प-चर्चिता।। 127।।

स्वयम्भू-पुष्प-निरता स्वयम्भू-कुसुम-ग्रहा। स्वयम्भू-पुष्प-यज्ञांगा स्वयम्भू-कुसुमात्मिका।। 128।।

स्वयम्भू-पुष्प-निचिता स्वयम्भू-कुसुम-प्रिया। स्वयम्भू-कुसुमादान-लालसोन्मत्त-मानसा।। 129।।

स्वयम्भू-कुसुमानन्द-लहरी-स्निग्ध देहिनी। स्वयम्भू-कुसुमाधारा स्वयम्भू-कुसुमा-कला।। 130।।