दूसरी लहर काबू करने को हिमाचली उद्योगों ने झोंकी ताकत

By: May 13th, 2021 12:08 am

विपिन शर्मा — बीबीएन

कोरोना के कहर से जूझ रहे देश को राहत दिलाने के लिए हिमाचल जी जान से जुट गया है। एशिया के फार्मा हब बद्दी में इस समय दिन-रात धड़ाधड़ जीवनरक्षक दवाएं तैयार की जा रही है। यही दवाएं देश भर के कोरोना संक्रमितों और आम लोगों को इम्यून करके स्वास्थ्य लाभ पहुंचाई जा रही हैं। बात चाहे कोरोना के उपचार के लिए कारगर मानी जा रही दवाओं व इंजेक्शन की हो या अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की। हिमाचल के दवा उद्योग 24 घंटे उत्पादन कर देश भर की दवा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। मौजूदा समय में यहां के उद्योग कोरोना संक्रमितों के उपचार में प्रयोग लाई जा रही दवाओं मसलन रेमडेसिविर, फेविपिराविर, डॉक्साईक्लीन, पैरासिटामोल, एजीथ्रोमाइसिन, आइवरमेक्टिन, मल्टीविटामिन का धड़ाधड़ उत्पादन कर रहे हैं। बता दें कि देश में बिक रही हर तीसरी दवा हिमाचल के उद्योगों में निर्मित हुई है, घरेलू बाजार में प्रदेश के दवा उद्योगों की हिस्सेदारी करीबन 35 फीसदी है। यही वजह रही है कि कोरोना की दूसरी लहर से ऊपजे संकट के बीच देश की निगाहें एक बार फिर प्रदेश के दवा उद्योगों पर जा टिकी है।

 दरअसल पहली लहर के दौरान हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का रिकार्ड उत्पादन कर प्रदेश के  दवा उद्योगों ने लोहा मनवाया था, अब देश भर में जिस रेमडेसिविर इंजेक्शन सहित अन्य सबंधित दवाओं को लेकर हाहाकार मचा है, उनके उत्पादन के लिए दवा कंपनियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।  मौजूदा समय में यहां हर माह सवा चार लाख से ज्यादा रेमडिसविर इंजेक्शन का उत्पादन हो रहा है, इसके अलावा फेविपिराविर की पचास लाख से ज्यादा डोज हर माह बनाई जा रही है, जबकि अन्य आवश्यक दवाओं का भी जमकर उत्पादन हो रहा है, ताकि इन दवाओं की किसी भी सूरत में किल्लत न हो। यहां वैश्विक फार्मा दिग्गज डा. रेड्डी लैब बद्दी, सिप्ला, हैटरो, जूबिलेंट फार्मा, नितिन लाइफ साइंससेज रेमडेसिविर का उत्पादन कर रही है।  पांवटा साहिब स्थित नितिन लाइफ साइंससेज में प्रति माह तीन लाख से ज्यादा रेमेडेसिविर का निर्माण हो रहा है, जबकि इमेक्यूल नालागढ़ व डा. रेड््डी बद्दी की प्रति माह उत्पादन क्षमता 70 हजार के करीब है। एंटीवायरल दवा फेविपिरविर (फैबी लू) का निर्माण ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स कंपनी बद्दी में कर रही है, यहां हर महीने 50 लाख से ज्यादा डोज बनाई जा रही है। (एचडीएम)

अब निर्यात में भी होंगे आगे

एशिया के सबसे बड़े फार्मास्यूटिकल हब का तमगा हासिल कर चुका हिमाचल घरेलू बाजार के साथ  निर्यात क्षेत्र का भी सिरमौर बनने की ओर अग्रसर है। आलम यह है, अगले कुछ वर्षों में हिमाचल की गिनती देश के उस राज्य के तौर पर होगी, जहां की सबसे ज्यादा दवा कंपनियां दवाआें का निर्यात कर रही हैं। वर्तमान में प्रदेश की दवा कंपनियां सालाना 15 हजार करोड़ रुपए की दवाओं का निर्यात कर रही है।

देश का 35 फीसदी उत्पादन प्रदेश में

हिमाचल का दवा उद्योग सालाना 40 हजार करोड़ क ा कारोबार कर रहा है, जो देश के कुल दवा कारोबार का करीब 35 फीसदी है। देश-दुनिया की कुल अग्रणी फार्मा कंपनियों में से आधे से ज्यादा प्रदेश में ही दवा निर्माण कर रही हैं। प्रदेश में करीबन 700 फार्मा व कॉस्मेटिक कंपनियां उत्पादन कर रही हैं, अके ले बीबीएन में ही पांच सौ के करीब फार्मा व कॉस्मेटिक इकाइयां स्थापित है। इनमें से 200 से ज्यादा ईयू अप्रूवड, 200 से ज्यादा डब्ल्यूएचओ व जीएमपी और यूएसएफडीए अपू्रवड हैं।