घर के पास बिक जाएगा सेब

By: May 9th, 2021 12:10 am

अगले सीजन में चार मंडियों में हो पाएगा एप्पल का कारोबार, मेहंदली, अणु, खड़ापत्थर की मार्केट में मिलेगी सुविधा, किन्नौर के टापरी में भी मिलेगी सहूलियत…

हिमाचल के सेब बागबानों के लिए आगामी सीजन में चार मंडियों में सेब का कारोबार होगा। शिमला की अणू,  मैंहदली, खड़ापत्थर और जिला किन्नौर की टापरी मंडियों में सेब बिक्री की सुविधा बागवानों को मिलेगी। इससे किन्नौर, शिमला और आउटर कुल्लू के बागबान घरों के नजदीक सेब बेच पाएंगे। इससे बागबान कोरोना संक्रमण के अलावा बाहरी मंडियों में ठगी का शिकार होने से भी बच सकेंगे।

प्रदेश के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब करीब 15 जून तक तैयार हो जाता है और बागबान मंडियों में सेब बेचना शुरू कर देते हैं। इस कारण से सेब की बिक्री के लिए प्रदेश सरकार और हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड ने अभी से मंडियों में सेब बागबानों के लिए व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। अभी तक प्रदेश के बागबानों को सेब बेचने में अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता था। बागबानों को अभी तक ढली और भट्ठाकुफर मंडियों में सेब बेचने के लिए आना पड़ता था। पिछले कुछ साल से सरकार ने पराला मंडी भी बागबानों की फसलें खासकर सेब बेचने के लिए खोल रखी है। इसके बाद भी बागबानों को सेब बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन सब बातों को ध्यान में रखकर सरकार अणू,  मैंदली, खड़ापत्थर और जिला किन्नौर की टापरी मंडियों में सेब बिक्री के लिए बागबानों को सुविधा देने की तैयारी कर चुकी है। इन मंडियों में सेब की बिक्री होने से बागबानों को समय और धनराशि की बचत भी होगी। बागबानों को अपने बगीचों के समीप ही सेब बेचने में मदद भी मिलेगी।

प्रदेश की पुरानी मंडियों में सेब से लदे वाहनों की भीड़ भी कम होगी और बिचौलियों की मनमानी पर भी काफी हद तक नकेल कसी जा सकेगी। हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक नरेश ठाकुर ने कहा कि आगामी सीजन में बागबानों के लिए चार मंडियों को सेब की बिक्री के लिए खोला जा रहा है। बागबानों को सेब बेचने के लिए अधिक मंडियां मिल पाएंगी और उनको परेशानी भी कम उठानी पड़ेगी।

   रिपोर्टः रोहित सेम्टा, डीएचडीएम

मनरेगा के बाद मशरूम ने दी महिलाओं को ताकत

बरसों पहले रोजगार गांरटी योजना आई तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं। मनरेगा से उनका अपना बैंक बैलेंस बना। जीवन स्तर में सुधार आया। कुछ ऐसे ही अब मशरूम उत्पादन महिलाओं ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। एक खबर …

सरकाघाट की महिलाएं कर रही अच्छी कमाई

मंडी जिला में सरकाघाट नगर परिषद के वार्ड नंबर दो रामनगर की महिलाओं ने कमाल कर दिया है। यह कमाल उन्होंने मशरूम उत्पादन में किया है। कुछ समय पहले इस क्षेत्र की 35 महिलाओें ने मशरूम उगाने की ट्रेनिंग ली थी। टे्रेनिंग के बाद महिलाओं ने यह काम शुरू किया। किसी ने 10 बैग रखे, तो किसी ने 30 और किसी ने पचास पर मशरूम उगाना शुरू कर दिया।

करीब 20 दिन बाद पहली फसल तैयार हुई, तो यह फसल हाथोंहाथ बिक गई। मशरूम में एक बार फसल आना शुरू होती है, तो यह तीन महीने तक चलती रहती है। फिलहाल यह महिलाएं अच्छी कमाई कर रही हैं। मशरूम उगाने वाली महिलाओं सलोचना, विमला, लता, रूमा देवि, कमली, पुष्पा देवी, मंजुला व मंजु आदि ने बताया कि कई लोग घर से मशरूम ले जाते हैं। यह अच्छा काम है। इन महिलाओं की तरह ही प्रदेश के कई इलाकों में मशरूम उगाने का क्रेज बढ़ रहा है। बहरहाल मशरूम की खेती से अगर ज्यादा महिलाएं जुडेंगी, तो यह रोजगार गारंटी की तरह उनके जीवन में खुशहाली ला देगा।

रिपोर्टः नगर संवाददाता, सुंदरनगर

आठ नए गेहूं खरीद केंद्र, पर शाहपुर में अनाज क्लेक्शन सेंटर न खुला

हिमाचल में किसानों के लिए जगह-जगह गेहूं खरीद केंद्र खोले जा रहे हैं। इससे किसानों को फायदा मिलेगा, लेकिन सरकार अभी किसान बहुल इलाके शाहपुर में अनाज संग्रहण केंद्र को चालू नहीं कर पाई है। एक खबर

बिलासपुर, हमीरपुर व मंडी जिला के कुछ क्षेत्रों के किसानों को अब अपनी गेहूं  बेचने के लिए नहीं भटकना पड़ेगा। अब घुमारवीं में भारतीय खाद्य निगम व कृषि विभाग ने गेहूूं खरीद केंद्र खोल दिया गया है। इसका लाभ कई किसानों को मिलेगा। खाद्य आपूर्ति मंत्री गर्ग ने कहा कि प्रदेश में आठ गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं। घुमारवीं के अलावा कालाअंब, पांवटा साहिब व ऊना, हरोली, नालागढ़, कांगड़ा जिला के तहत इंदौरा के अलावा मंड में गेहूूं खरीद केंद्र खोले गए हैं, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी आभार जताया है।

उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद केंद्र खुलने के चलते अब किसानों को गेहूं की फसल बेचने के लिए समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी।  दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रदेश के किसान बहुल इलाके में अनाज खरीद केंद्र न खोलने पर रोष जताया है।  कांग्रेस महासचिव केवल पठानिया ने कहा कि शाहपुर के गोरड़ा में अनाज क्लेक्शन सेंटर कांग्रेस के कार्यकाल में मंजूर हुआ था,जिसे प्रदेश सरकार चालू नहीं कर पाई है। शाहपुर के केंद्र में कांगड़ा, जवाली,पालमपुर, बैजनाथ, नगरोटा बगवां व सुलाह आदि के किसानों को फायदा मिलना था। गौर रहे कि कांगड़ा घाटी में गेहूं और धान की बड़े पैमाने पर पैदावार की जाती है। ऐसे में यह हजारों किसानों के लिए एक बड़ा मसला है।

रिपोर्टः कार्यालय संवाददाता, बिलासपुर

हिमाचल में अब तक 24 हजार क्विंटल खरीदी गेहूं

हिमाचल प्रदेश में अब तक किसानों से 24,338 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। यह बात कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने गेहूं खरीद केंद्र कांगड़ व टकारला का निरीक्षण करने के बाद कही। कंवर ने कहा प्रदेश में आज 10 स्थानों पर गेहूं की खरीद की जा रही है, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बाहरी राज्यों में जाना पड़े। उन्होंने कहा कि जिला ऊना में एफसीआई के माध्यम से कांगड़ व टकारला में किसानों से गेहूं खरीदी जा रही है तथा इन दोनों केंद्र पर अब तक 5043 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है।

निरीक्षण के दौरान वीरेंद्र कंवर व सतपाल सिंह सत्ती ने केंद्रों पर खरीद प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली तथा अधिकारियों को ग्रेडिंग मशीनें बढ़ाकर खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। कंवर ने इसके लिए कृषि विभाग को कांगड़ में दो अतिरिक्त ग्रेडिंग मशीन तथा टकारला में भी एक अतिरिक्त मशीन लगाने के निर्देश दिए, ताकि खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कांगड़ व टकारला में खराब मौसम तथा बारिश के दौरान किसानों को दिक्कत आती है, इसलिए यहां पर शैड लगाया जाएगा, ताकि बारिश में भी किसान की फसल की खरीद में दिक्कत न आए। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को शैड का निर्माण जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए शौचालयों का भी निर्माण किया जाएगा। कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि जिला ऊना में एक बड़ी अनाज मंडी बनाई जाएगी, जिसका जल्द ही शिलान्यास होगा तथा इसका निर्माण कार्य भी शुरू करवाया जाएगा। कोशिश की जाएगी कि आने वाले दो वर्षों के भीतर अनाज मंडी बनकर तैयार हो जाए।

 रिपोर्टः दिव्य हिमाचल  ब्यूरो, ऊना

बिचित्र का ‘विचित्र‘ है पशु प्रेम, सुलाह के ग्रामीण ने कायम की मिसाल

मौजूदा समय में लोग जहां अपने दुधारू पशुओं को ख्ुला छोड़ रहे हैं, वहीं कुछेक हस्तियां ऐसी भी हैं,जो पशु प्रेम की मिसाल कायम कर रही हैं। कुछ ऐसा ही पुण्य कार्य कर रहा है सुलाह क्षेत्र का एक परिवार। एक खबर

सड़कों पर बेसहारा छोड़े जाने वाला पशुओं का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। काम के लायक न रहने  वाले इन पशुओं को लावारिस छोड़ दिया जाता है। समाज में कई ऐसे लोग हैं,जो इन पशुओं को सहारा दे रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं बडघ्वार पंचायत के रहने वाले बिचित्र सिंह। बिचित्र सिंह का गांव सुलाह हलके के तहत आता है। अपनी माटी टीम के सीनियर जर्नलिस्ट जयदीप रिहान ने बिचित्र सिंह से मुलाकात की। 77 साल के बिचित्र अपनी बांझ गाय और बैल की पिछले छह सालों से पूरी सेवा इस सोच से कर रहे हैं कि इन्हें बेसहारा छोड़ देना अधर्म है। सेना 1985 में रिटायर हुए बिचित्र ने दूसरी नौकरी करने के बजाय घर में रह कर खेती बाड़ी और पशुपालन का फैलसा लिया।  बिचित्र कहते हैं कि उनके पास एक गाय गौरां और उसी गाय का बछड़ा नंदी है को जो कि अब छह साल का बैल बन गया है। गाय भी बरसों से दूध नहीं दे रही है। इन पशुओं पर हर महीने अढ़ाई हजार तक खर्च होता है,लेकिन इस परिवार ने कभी इन्हें छोड़ने की नहीं सोची। आज समूचे प्रदेश को बिचित्र जैसे पशुपालकों की जरूरत है।

कृषि विभाग के पास पहुंचा मक्की-चरी व बाजरे का बीज

हिमाचल में गर्मी के सीजन में पैदा होने वाली फसलों के लिए  किसानों ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए कृषि विभाग भी जुट गया है। पढि़ए यह खबर

गेहूं की थ्रैशिंग के बाद किसानों ने मक्की-चरी और बाजरे की बिजाई की तैयारियां शुरू कर दी हैं। किसानों के साथ साथ कृषि विभाग ने भी इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अपनी माटी ने इन्हीं तैयारियों का जायजा लेने के लिए हमीरपुर जिला का दौरा किया।

वहां पता चला कि कृषि विभाग के पास मक्की, चरी व बाजरे का बीज पहुंच गया है, जिसे ब्लॉकों को डिमांड के मुताबिक भेजा जा रहा है। बीज को लाइसेंस होल्डर डिपुओं और सेल सेंटरों में भी मुहैया करवाया जा रहा है। अकेले हमीरपुर  ब्लॉक  के सात डिपुओं में चरी का 170 क्विंटल बीज पहुंचा है।

यहां जल्द ही संबंधित डिपुओं में मक्की और बाजरे का बीज पर मुहैया करवा दिया जाएगा। किसानों को चरी 31 रुपए किलो के हिसाब से मिलेगी। मक्की व बाजरे का बीज भी जल्द ही लोगों को घरद्वार तक पहुंचाया जाएगा। कुल मिलाकर प्रदेश भर में बीज मुहैया करवाने का काम चल रहा है।

 रिपोर्टः कार्यालय संवाददाता, हमीरपुर

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