अब बछड़ी ही पैदा करेगी गाय

By: Apr 25th, 2021 12:10 am

कृषि विश्वविद्यालय ने शुरू किया बड़ा एक्सपैरिमेंट

ज्यादातर पशुपालक चाहते हैं कि उनकी गाय बछड़ी पैदा करे, ताकि भविष्य में उन्हें दूध देने वाला पशु मिले। इस दिशा में समय-समय पर प्रयास भी हुए हैं, लेकिन इन दिनों कृषि विश्वविद्यालय बड़ा प्रयोग कर रहा है। एक खबर…

पालमपुर विश्वविद्यालय में गाय को लेकर बड़ा एक्सपैरिमेंट शुरू हो गया है। इसके तहत गाय को ऐसा टीका लगाया जाएगा, जिससे वह सिर्फ बछड़ी पैदा करेगी। कृषि विवि ने मेक इन इंडिया के तहत चल रही एक कंपनी से करार भी कर लिया है। इस प्रोजेक्ट पर प्रयोग भी शुरू हो गए हैं। अपनी माटी के लिए हमारे सीनियर जर्नलिस्ट जयदीप रिहान ने विवि का दौरा किया। उन्हें कुलपति प्रोफेसर हरिंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि पुणे की कंपनी से करार के बाद इस पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत सैक्सड सीमन तकनीक के जरिए मेल और फीमेल डिसाइड करना हमारे हाथ में होगा।  उम्मीद है इस प्राजेक्ट में जल्द बड़ी कामयाबी मिलेगी, जिससे किसानों की तकदीर बदल जाएगी।

गेहूं की  साढ़े 32 करोड़ की फसल खराब

पहले सूखे की मार पड़ी अब बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों को प्राकृति की मार इस बार भारी पड़ रही है। पहले गेहूं की फसल को लेकर किसान बारिश का इंतजार करते रहे, लेकिन करीब तीन माह तक बारिश नहीं हुई। इसके चलते किसानों की गेहूं की फसल के अलावा अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा। वहीं, अब जब किसानों ने अपनी गेहूं की फसल की कटाई का कार्य शुरू कर दिया था। वहीं, अब बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरा है। बारिश से किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। इस बार किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। जानकारी के अनुसार इस बार किसानों की गेहूं की फसल को जिला में करीब साढ़े 32 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके अलावा अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ है। जैसे-तैसे कर किसानों ने गेहूं की फसल पर पड़ रही सूखे की मार को झेला। इसके बाद किसानों की इस माह में गेहूं की फसल का कटाई का कार्य जोरों पर चला हुआ है। कई किसानों ने फसल की कटाई के बाद थ्रैसिंग कार्य पूरा कर लिया है, लेकिन अभी भी अधिकतर किसान ऐसे हैं जिनकी फसल कट गई है, लेकिन थ्रैसिंग कार्य नहीं हुआ है। कइयों की फसल खेतों में ही है, लेकिन अब हुई जोरदार बारिश ने किसानों की गेहूं की फसल को एक तरह से बर्बाद ही कर दिया है। रिपोर्टः कार्यालय संवाददाता, बिलासपुर

अधिकारियों को भेजी रिपोर्ट

उधर, इस बारे में कृषि विभाग के उप निदेशक केएस पटियाल ने कहा है कि कृषि विभाग द्वारा सूखे के नुकसान की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है।

अब ओलों ने बर्बाद किए मटर-टमाटर

बैंगन, भिंडी का भी काम तमाम

पहले लंबे समय से बारिश नहीं हुई और अब मौसम ने करवट ऐसे समय ली है, जब जरूरत कुछ और थी। प्रदेश के कई इलाकों में ओलों और तूफान ने नकदी फसलें बर्बाद कर दी हैं। पढि़ए यह खबर…

प्रदेश के पहाड़ों से लेकर मैदानों तक ओलों ने नकदी फसलें बर्बाद कर दी हैं। शिमला, सोलन, सिरमौर से लेकर मंडी, कुल्लू व कांगड़ा-चंबा के कई इलाकों में हाल ही में ओलावृष्टि ने नकदी फसलें मटियामेट कर डाली हैं। बात मटर-टमाटर की हो या फिर बैंगन, भिंडी की। बात खीरे की हो या फिर करेले की। हर फसल पर बुरा असर पड़ा है। गर्मियों में होने वाली नकदी फसलें इन दिनों काफी कमजोर होती हैं। ऐसे में इन्हें भारी नुकसान हुआ है। अपनी माटी टीम ने मिनी पंजाब के नाम से मशहूर बल्ह घाटी के गागल, सकरोहा, खांडला व चुवाड़ी आदि गांवों का दौरा किया तो पता चला कि ओलों ने नकदी फसलें बर्बाद कर डाली हैं। खासकर मटर की हालत बेहद खराब है। कमोबेश हिमाचल के बहुत सारे इलाकों से ऐसी रिपोट्स हैं। फिलहाल किसान सभा व पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि किसानों को नुकसान का मुआवजा प्रदान किया जाए।

                                                                                                                 रिपोर्टः निजी संवाददाता, गागल

खाने से पहले अच्छी तरह धोएं फल और सब्जियां, यह है बड़ा कारण

फल सब्जियों को लेकर अकसर इस बात की चर्चा रहती है कि इसमें कहीं कीटनाशक तो नहीं हैं। अगर आपने पौधे पर स्प्रे की है, तो इसका जवाब है हां, ऐसा हो सकता है। इसके लिए हमें कुछ सावधानियां बरतनी होती हैं। पढि़ए यह खबर

जब हम सब्जी में कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं,तो समय के साथ धीरे-धीरे इसका असर कम होता जाता है। ये स्प्रे या दवाएं कीटों को तो खत्म कर देती हैं, पर अगर उस फसल को समय से पहले तोड़ लिया जाए, तो उस सब्जी या फल में इसके अवशेष रहे जाते हैं। ये अवशेष हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। नौणी यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने बताया कि यूनिवर्सिटी  फल-सब्जियों में कीटनाशक के अवशेषों की जांच लैब में की जाती है। डा अजय शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ एंटोमोलॉजी इससे पता चल जाता है कि किस फल या सब्जी में कितना कीटनाशक है। कुल मिलाकर किसान भाइयों को यही संदेश हैं कि जिन पौधों पर स्प्रे की होती है, उनसे समय से पहले फल या सब्जियों का तुड़ान न किया जाए। इस खबर का पूरा वीडियो दिव्य हिमाचल टीवी और वेबसाइट पर भी है।

रिपोर्टः निजी संवाददाता, सोलन

सेब का समर्थन मूल्य 25 रुपए क्यों नहीं

किसान खेतिहर जिला कुल्लू की बैठक मंगलवार को सर्किट हाउस ढालपुर कुल्लू में हुई, जहां पर  बैठक में  किसानों व बागबानों की समस्यों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में हुई चर्चा को लेकर जिला कुल्लू खेतिहार किसान यूनियन के अध्यक्ष रमेश ठाकुर ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसानों की समस्याओं, जिसमें प्रदेश सरकार द्वारा सेब का समर्थन मूल्य निर्धारण कम से कम 25 रुपए करना। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कृषि व बागबानी के उपकरणों पर सबसिडी का प्रावधान तो रखा है, पर सबसिडी पाने के लिए जिस जटिल प्रक्रिया में गुजरना पड़ता है, उसमें बहुत समय लगता है। उसमें भी यदि किसी फाइल में कहीं कोई त्रुटि रह जाती है तो किसानों कि फाइलें अधिकारियों के कार्यालय में ही रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को जो भी उनकी समस्याएं हैं, उनसे उन्हें जल्द छुटकारा दिलाएंगे।                                                                                                                                    रिपोर्टः निजी संवाददाता, कुल्लू

किसानों ने कड़ी मेहनत से उगाया अमरीकी केसर, पर मार्केट न मिलने से छाई मायूसी

किसानों की मेहनत पर कभी अंबर पानी फेर देता है, तो कभी हमारा लचर सिस्टम। इसी लचर सिस्टम का एक बड़ा उदाहरण मंडी जिला के सुंदरनगर इलाके में पेश आया है। एक खबरः

मंडी जिला में सुंदरनगर हलके के तहत खिलड़ा नामक पंचायत है। इस पंचायत के किसान नए नए प्रयोग करते हैं। इस बार किसानों ने यहां अमरीकी केसर तैयार किया है, लेकिन अब किसानों के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई है कि आखिर वे इस फसल को बेचें कहां। इस बारे में अपनी माटी टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची। हमें प्रगतिशील किसान चंपा देवी ने बताया कि  उन्होंने पिछले वर्ष ही अमरीकी केसर की पौध तैयार की थी। जिसे इस सीजन में चार-पांच बिस्वा में लगाया है और अच्छी फसल है, लेकिन मार्केट न होने के कारण उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया है। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि तैयार होने के बाद केसर के फूलों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 60 से 70 हजार रुपए प्रति किलो है। बताया कि केसर की फसल छह महीने में तैयार हो जाती है। अमरीकी केसर के फूल को तोड़कर छांव में सुखाया जाता है। किसान शेर सिंह ने कहा कि सरकार चाहे तो इससे  बेरोजगारों को रोजगार मिला होगा। बहरहाल किसानों ने जिला प्रशासन, सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस दिशा में उचित कदम उठाए जाएं ताकि बड़े पैमाने पर अमरीकी केसर की खेती की जा सके।

रिपोर्टः स्टाफ रिपोर्टर, सुंदरनगर

केसर के फेर में न फंसें किसान महकमे ने क्यों किया आगाह

जिला में केसर की पैदावार कर कुछ ही समय में लखपति बनने के सपने संजोए रखने वाले किसान जरा गौर फरमाएं। जिला में केसर की पैदावार को लेकर मौसम अनुकूल नहीं है। यहां पर केसर की पैदावार होना असंभव ही है। इसके चलते जिला के किसान किसी के भी बहकावे में न आएं और अज्ञात लोगों से इस तरह का बीज महंगे दामों पर खरीदकर गुमराह न हो। इससे किसानों को नुकसान ही झेलना पड़ेगा। दूसरी ओर कृषि विभाग की ओर से यहां पर केसर की पैदावार होने को लेकर संदेह जताया गया।

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो जिला का मौसम केसर की पैदावार के लिए अनुकूल नहीं है। केएस पटियाल, उपनिदेशक कृषि विभाग ने कहा कि केसर फसल उत्पादन को लेकर कृषि विभाग जांच करेगा। सोशल मीडिया पर केसर पैदावार को लेकर खूब चर्चा रही। जिला का मौसम केसर पैदावार के लिए अनुकूल नहीं है। वहीं, जिला के किसान गुमराह न हों। कृषि पैदावार के लिए कृषि विभाग से संपर्क जरूर करें।

रिपोर्टः कार्यालय संवाददाता, बिलासपुर

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