हिमाचल की नई पहचान लाल धान

By: Apr 18th, 2021 12:05 am

हिमाचल के चार जिलों में पैदा होने वाले लाल धान ने पहाड़ की खेती को हमेशा बुलंद किया है। विशेष किस्म का यह चावल औषधीय गुणों से भरपूर है। इसी कारण अब यह धान नया मुकाम हासिल करने वाला है …

* जीआई टैग दिलाने के लिए कसरत तेज, साढ़े चार सौ से लेकर पांच सौ रुपए किलो बिकता है छोहारटू

लाल धान यानी छोहारटू हिमाचल के चार जिलों में पाया जाता है। यह कांगड़ा, चंबा, कुल्लू और शिमला में होता है। बाजार में इस चावल की कीमत साढ़े चार सौ रुपए से लेकर पांच सौ रुपए किलो तक होती है। ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय ने इस धान को जीआई टैग दिलवाने का प्रयास तेज कर दिया है। कुलपति एचके चौधरी के प्रयासों से हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में जीआई टैग के लिए अपनी प्रस्तुति दाखिल कर दी है। जीआई टैग मिलने के बाद यह धान हिमाचल को नई पहचान देगा। इसके बारे में कुलपति एचके चौधरी ने कहा कि हिमाचल में पाए जाने वाले धान की क्वालिटी बेहद खास है। इसमें छोहारटू के अलावा कुल्लू का जाटू, देवल व मताली प्रमुख है। इसी तरह चंबा का करड और सुकारा व कांगड़ा का देशी धान काली झीणी व बेगमी प्रमुख हैं। ये सारी किस्में लाल धान की हैं। लाल चावलों में पोषक तत्त्व, लोहा, जस्ता, एंटीआक्सीडेंट तथा विटामिन पाए जाते हैं। ये धान रक्तचाप, बुखार, श्वेत प्रदर व गर्भावस्था से संबंधित रोगों में लड़ने में सहायक हैं। शिमला जिला के छोहारा व रनसार घाटी में लगभग 500 हेक्टेयर पर छोहारटू धान उगाया जाता है। यह प्रदेश की पहली किस्म है, जिसे 2013 में कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण भारत सरकार के तहत पंजीकृत करवाया गया है। खास बात यह कि हिमाचल के मेहनतकश किसान भाइयों ने पुश्तों से इन बीजों को सहेजा है।

डिजिटल प्लेटफार्म ने कर दिया मालामाल

सूखे से भारी नुकसान की खबरों के बीच हिमाचली किसानों के लिए कहीं-कहीं मटर की पैदावार खुशियां ला रही है। सोलन में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। पढि़ए यह खबर…

* सात दिन में 20 रुपए किलो बढ़े मटर के रेट

* कम प्रोडक्शन संग डिजिटल प्लेटफार्म को माना जा रहा कारण

मटर के बढ़ते दामों ने किसानों को मालमाल कर दिया है। अर्से बाद इस वर्ष  किसानों को मटर का रेट 52 रुपए प्रतिकिलो तक मिल रहा है। देश भर के व्यापारी हिमाचली मटर की खरीद के लिए सोलन पहुंच रहे हैं। बीते एक माह में मटर के रेट में बीस रुपए प्रतिकिलो तक की बढ़ोतरी हुई है। मार्केट कमेटी के सचिव रविंद्र शर्मा ने बताया कि इन दिनों केवल मटर की फसल ही किसान मंडी में लेकर आ रहे हैं। मटर के बढ़ते रेट की पहली बार डिजिटल प्लेटफार्म भी माना जा रहा है।  ई-नाम व फेसबुक पेज के माध्यम से  देश भर के व्यापारी सोलन मंडी से संपर्क कर रहे हैं, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के किसानों को हो रहा है। दूसरी वजह मटर का कम उत्पादन हो सकता है।

प्रदेश में इस वर्ष मटर का उत्पादन बीते वर्ष की अपेक्षा कम हुआ है। इस वर्ष अभी तक मंडी में बीस हजार क्विंटल मटर मंडी में पहुंचा है, जो कि बीते वर्ष की अपेक्षा तीस प्रतिशत तक कम है। आने वाले दिनों में मटर का रेट ओर अधिक बढ़ सकता है। पंजाब, हरियाणा का मटर अब समाप्त होने की कगार पर है, इसलिए हिमाचली मटर के रेट में  इजाफा होने की उम्मीद है।

रिपोर्टः भूपेद्र ठाकुर, डीएचडीएम

सोलर बाड़ पर 80 फीसदी छूट से कितना फायदा

समूह में बाड़ लगाने के लिए 85 प्रतिशत अनुदान अब योजना में कांटेदार-चेनलिंक बाड़ भी शामिल

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना हिमाचल में सुरक्षित खेती की नई इबारत लिख रही है। किसी समय जंगली जानवरों व बेसहारा पशुओं के उत्पात के कारण खेती छोड़ चुके किसान अब दोबारा फसल उत्पादन की ओर लौटे हैं। योजना के तहत पूरे प्रदेश सहित हमीरपुर जिला में भी सोलर फेंसिंग व कांटेदार तार के माध्यम से बाड़बंदी कर फसलों का संरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इस योजना के तहत व्यक्तिगत सोलर बाड़बंदी के लिए 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। वहीं, किसान समूह आधारित बाड़बंदी के लिए 85 प्रतिशत सबसिडी दी जा रही है। योजना में कांटेदार व चेन लिंक बाड़बंदी भी शामिल की गई है, जिस पर 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध है। इसी प्रकार कंपोजिट बाड़बंदी पर 70 प्रतिशत सबसिडी दी जा रही है। पूरे प्रदेश में गत तीन वर्षों में 3873 से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। प्रदेश में योजना पर 105 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं और गत वित्त वर्ष में इसके लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। हमीरपुर जिला में भी गत तीन वर्षों में इस योजना के अंतर्गत लगभग साढ़े सात करोड़ रुपए की राशि व्यय की गई है। इस अवधि में 312 लाभार्थी किसानों ने सोलर फेंसिंग व कांटेदार तार द्वारा बाड़बंदी कर फसलों का संरक्षण किया है।

रिपोर्टः स्टाफ रिपोर्टर-हमीरपुर

पूरे प्रदेश में बंटेंगे सेब के ये बूटे

सिरमौर में अमरीकी वैरायटी की पौध की आधा किस्में तैयार

जिला सिरमौर में तैयार अमरीकी  सेब की रूट स्टॉक से तैयार पौध को पूरे प्रदेश में लगाया जाएगा। जिला सिरमौर में बागबानी विकास योजना के तहत अमरीकी सेब वैरायटी की लगभग आधा दर्जन किस्में विभिन्न उद्यान प्रदर्शन केंद्रों में तैयार की जा रही हैं, जो कि दो वर्षों बाद उत्पादन देना आरंभ कर देता है। जिला सिरमौर में 4.80 लाख सेब के पौधों व रूट स्टॉक को तैयार किया जा रहा है, जिसके रिजल्ट उम्दा बताए गए हैं। अमरीकी  सेब वैरायटी दो वर्षों के बाद ही साइज, कलर के साथ गुणवत्तायुक्त सेब देगी। जिला सिरमौर में हॉल्टीकल्चर डिवलेपमेंट प्रोजेक्ट के तहत शिरू माइला फार्म पर इन दिनों अमरीकी सेब की बड 10 व जेनेवा 41 किस्म के 60 हजार पौधों की रूट स्टॉक लगाई जा रही है जो कि आगामी डेढ़ व दो वर्ष के बीच तैयार होगी। जिला सिरमौर में इसके लिए 47 क्लस्टर बनाए गए हैं, जिसमें 2250 हेक्टेयर एरिया कवर किया जाएगा। जिला सिरमौर में राजगढ़, संगड़ाह, पच्छाद व शिलाई विकास खंडों में 47 क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनमें लगभग एक-एक क्लस्टर में 80 बागबानों को रखा गया है, सेब पौधों को उगाएंगे। वहीं एक क्लस्टर में सात से आठ हजार सेब के पौधे वितरित किए जाएंगे। अमरीकी वैरायटी का सेब समुद्र तल से चार हजार फुट की ऊंचाई से उपर उम्दा क्वालिटी का तैयार होगा। वहीं, इससे पूर्व के लगाए गए पौधों से भी सेब के उत्पादन परिणाम आना आरंभ हुए हैं, जिस पर बागबानी अधिकारियों ने संतोष जताया है। उधर, उपनिदेशक उद्यान विभाग सिरमौर सतीश शर्मा ने बताया कि जिला सिरमौर में अमरीकी वैरायटी की 4.80 लाख पौधों व रूट स्टॉक को तैयार किया जा रहा है।

एक किलो बाजरे पर 30 रुपए सबसिडी

गर्मियां आते ही मोटे अनाज की सप्लाई को लेकर कृषि विभाग गंभीर हो गया है। ब्लाकों में इसके बीज की सप्लाई का दौर शुरू हो गया है। पेश है यह रिपोर्ट

प्रदेश में ग्रीष्ण ऋतु में बीजे जाने वाले बीजों को लेकर कृषि विभाग  ब्लाकों में सप्लाई भेजने में जुट गया है। विभाग का प्रयास है कि समय पर ये बीज किसानों तक पहुंच जाएं। बीजों की सप्लाई को जांचने के लिए अपनी माटी टीम ने हमीरपुर का दौरा किया। वहां पता चला कि विभाग ने मंडल, बाजरा और कौगणीं का करीब 26 क्विंटल बीज ब्लॉकों को भेज दिया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत किसानों इस  बीज पर 30 रुपए प्रति किलो अनुदान दिया जा रहा है। ब्लॉकों को बाजरा का छह क्विंटल 20 किलो, मंडल का 19 क्विंटल 40 किलो और कौगणीं का एक क्विंटल 20 किलो बीज डिमांड के मुताबिक भेज दिया गया है। इसके अलावा ब्लॉकों में थ्री हॉर्सपॉवर की 100 इलेक्ट्रॉनिक मोटरें भी भेजी गई हैं, जिन्हें किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर मुहैया करवाया जा रहा है। इसके अलावा कीटनाशक और दवाएं भी भेजी कई हैं। विभाग के डा. अशोक कुमार, कृषि प्रसार अधिकारी, कृषि ब्लॉक हमीरपुर का कहना है कि सब्जियों में प्रयोग होने वाली कीटनाशक दवाइयां भी प्राप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। ये दवाइयां भी किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बांटी जा रही हैं, ताकि किसानों की सब्जियों को कोई दीमक नुकसान ना पहुंचा सके। कोई भी किसान इन्हें ब्लॉकों से खरीद सकता है। कृषि विभाग भी किसानों की डिमांड पूरी करने में लगा हुआ है, ताकि उन्हें बाजार से महंगें दामों पर कुछ भी खरीदना न पड़े।

इस बार क्यों कम होगा आम

कांगड़ा, चंबा और जिला मंडी के सुंदरनगर उपमंडल में फ लों के राजा आम की बढि़या क्वालिटी की फसल होती है। प्रदेश के ऐसे इलाके विभिन्न किस्मों के लिए कई दशकों से जाना जाते हैं। गत वर्ष आम की बंपर फसल होने और कौडि़यों के भाव बिकने के बाद बागबानों में काफ ी मायूसी व बर्बादी को झेला था। इस वर्ष फ लों के राजा आम के फसल गत वर्ष की अपेक्षा आधी होने के बाद इस बार आम रस को पीने के लिए लोगों को महंगे दाम चुकाने पड़ेंगे। अनुमान के इस वर्ष आम की फसल कम होने के चलते व मांग अधिक होने के कारण आम बगीचों से लेकर बाजार तक महंगे दामों पर मिलेंगे। गत वर्ष आम की बम्पर  फसल होने के बाद बागबानों को नुकसान के साथ मायूसी ही हाथ लगी थी। बगीचों में आम के पेड़ों के नीचे आम के सड़ने की दुर्गंध और अन्य फसलों को भी जंगली जानवरों से नुकसान पहुंचा था। वहीं, पर गत वर्ष आम बगीचों से दो से लेकर आठ रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिका था और जो बगीचे बिक नहीं पाए थे उनमें हर जगह केवल आम की सड़ांध चारों ओर फैली हुई थी । इस मर्तबा आम की फसल के अंकुर पेड़ों पर बहुत कम और फसल आने में भी दो से अधिक महीनों का समय लगता है। रिपोर्टः गगन शर्मा, डीएचडीएम

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