नगर निगम पालमपुर का कल शानदार

By: Feb 24th, 2021 12:08 am

अंतरराष्ट्रीय पटल पर चाय नगरी के नाम से विख्यात पालमपुर की एक पहचान और भी रही है। पालमपुर का नाम विश्व की सबसे छोटी नगर परिषदों में शुमार रहा है। मात्र 6.72 वर्ग किलोमीटर का दायरा और सिर्फ साढ़े तीन हजार की जनसंख्या वाली पालमपुर नगर परिषद को नगर निगम में बदलने में सात दशक का लंबा समय लग गया। नगर निगम पालमपुर की क्या कुछ हैं संभावनाएं, इस रास्ते में कितनी हैं चुनौतियां…

बता रहे हैं राकेश सूद और जयदीप रिहान

15 वार्ड… और 11 रिज़र्व

नवगठित पालमपुर नगर निगम में अनारक्षित वर्ग पर आरक्षण का चाबुक चला है। नगर निगम में बनाए गए 15 वार्डों में से जनरल कैटेगरी के लिए सिर्फ चार वार्ड होंगे। इससे अब तक पालमपुर नगर परिषद और साथ लगती पंचायतों में अब तक सक्रिय रहे जनरल कैटेगिरी के अनेक सदस्यों के पार्षद बनने की संभावनाओं पर पानी फिर गया है। विभिन्न श्रेणी की महिला उम्मीदवारों के लिए आठ वार्ड निर्धारित किए गए हैं। इस तरह पहले नगर निगम में 50 फीसदी से ज्यादा भागीदारी महिलाओं की होगी, जबकि पालमपुर नगर निगम में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम है। अनारक्षित वर्ग से संबंध रखने वाले पुरुषों के लिए मात्र चार वार्ड होंगे। इनमें पालमपुर खास, आईमा, घुग्गर खिलडु और बिंद्रावन शामिल हैं। नगर निगम में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या 8.49 फीसदी है और एसटी मेल श्रेणी के लिए लोहना वार्ड आरक्षित किया गया है।

नगर निगम के दायरे में आने वाले अनुसूचित जाति के लोगों का आंकड़ा 28.53 फीसदी है। एसटी के लिए चार वार्ड रखे गए हैं, जिनमे से दो महिलाओं के लिए हैं। वार्ड होल्टा और टांडा एससी उम्मीदवार के लिए तो राजपुर व चौकी एससी महिला के लिए आरक्षित है। पालमपुर अप्पर, सुग्घर, खलेट, मारंडा, घुग्गर टांडा और बनूरी से महिला उम्मीदवार चुनकर आएंगी।

पालमपुर नगर निगम और आरक्षण

वार्ड        जनसंख्या  आरक्षण

लोहना     3332      एसटी

पालमपुर अप्पर2463 महिला

पालमपुर खास2445  जनरल

आईमा     2583      जनरल

सुग्घर      2334      महिला

घुग्घर खिलडु  2975      जनरल

बिंद्रावन    3922      जनरल

खलेट      3080      महिला

चौकी      2808      एससी महिला

मारंडा     2499      महिला

राजपुर     2575      एससी महिला

घुग्घर टांडा 2439     महिला

टांडा       1934      एससी

बनूरी      2315      महिला

होल्टा      2681      एससी

टैक्स मनरेगा का लाभ न मिलने की थी आशंका

पंचायतों की जनता नगर निगम में लगने वाले टैक्सों और मनरेगा आदि योजनाओं के लाभ न मिलने की आशंका जता रही थी, तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नए नगर निगमों को फिलवक्त टैक्सों से मुक्त रखने और मनरेगा आदि का लाभ मिलते रहने की बात कहकर लोगों के भ्रम दूर कर दिए। अब जो फाइनल ड्राफ्ट बना है, उसमें करीब 14 पंचायतें शामिल की गई हैं, जिसमें जनसंख्या का आंकड़ा 40 हजार के पार है और नगर निगम का दायरा तीन हजार हेक्टेयर के आसपास होगा।

फिर शुरू हुई कोशिशें…और विरोध भी

इस बार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक बार फिर पालमपुर को नगर निगम का दर्जा दिलवाने को प्रयासरत लोगों ने अपनी कोशिशें शुरू कीं। इन कोशिशों को पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार का सहारा मिला, तो राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी और भाजपा महामंत्री त्रिलोक कपूर भी लोगों की मांग को आगे ले जाते दिखे। इस बार भी कहीं जनसंख्या, तो कहीं लोगों के मन में उठ रहे संशय से पालमपुर की स्थिति डांवाडोल होती रही। प्रदेश सरकार ने नगर निगम के लिए जनसंख्या का जरूरी आंकड़ा 50 हजार से कम करके 40 हजार कर दिया और प्रशासनिक अमले ने नगर परिषद के साथ 14 पंचायतों को जोड़कर जनसंख्या के जरूरी आंकड़े को पूरा कर दिखाया। नगर निगम की घोषणा के बाद भी अपने राजनीति भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगता देख पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े कुछ लोग विरोध पर उतर आए और मामला न्यायालय तक भी जा पहुंचा।

पालमपुर नगर निगम की जनसंख्या 40385

पालमपुर नगर निगम में कुल जनसंख्या 40385 है, जिसमें महिलाओं का आंकड़ा 49.18 प्रतिशत है। नगर निगम में 20524 पुरुष और 19861 महिलाएं हैं। पालमपुर नगर निगम के 15 वार्डों में से दो में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा और एक में बराबर है। इनमें से आठ वार्ड महिलाओं के आरक्षित किए गए हैं। इससे पालमपुर नगर निगम में महिला पार्षदों की संख्या पुरुषों से ज्यादा होगी। 11521 एससी और 3428 एससी नगर निगम में हैं। पालमपुर नगर निगम के चार वार्ड जनरल कैटेगिरी के लिए रखे गए हैं। इनमें कुल 2445 की जनसंख्या वाला पालमपुर खास, 2583 की जनसंख्या वाला आईमा, 2975 की जनसंख्या वाला खिलडु और 3922 की जनसंख्या वाला बिंद्रावन वार्ड शामिल हैं। लोहना वार्ड अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है। कुल 3332 की जनसंख्या वाले लोहना वार्ड में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या 21.22 प्रतिशत है।

टांडा व होल्टा वार्ड अनुसचित जाति के लिए आरक्षित होंगे। कुल 1934 की जनसंख्या वाले टांडा वार्ड में अनुसूचित जाति के लोगों का आंकड़ा 42.92 प्रतिशत है, जबकि कुल 2681 की जनसंख्या वाले होल्टा वार्ड में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या 37.22 फीसदी है। पालमपुर अप्पर, सुग्घर, खलेट, मारंडा, घुग्घर टांडा और बनूरी वार्ड महिला के लिए आरक्षित होंगे। कुल 2463 जनसंख्या वाले पालमपुर अप्पर वार्ड में महिलाओं की संख्या 49.37 प्रतिशत है। कुल 2334 जनसंख्या वाले सुग्घर वार्ड में महिलाओं का आंकड़ा 50.81 प्रतिशत है। कुल 3080 जनसंख्या वाले खलेट वार्ड में महिलाओं की भागीदारी 50 फीसदी है।

कुल 2499 जनसंख्या वाले मारंडा वार्ड में महिलाओं का ग्राफ 49.82 प्रतिशत है। 2439 जनसंख्या वाले घुग्घर टांडा वार्ड में महिलाओं की संख्या 49.45 फीसदी है, जबकि कुल 2681 जनसंख्या वाले बनूरी वार्ड में महिलाओं का आंकड़ा 46.36 प्रतिशत है। 2808 जनसंख्या वाला चौकी वार्ड अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है, जिसमें एससी का आंकड़ा 39.92 प्रतिशत है। कुल 2575 की जनसंख्या वाले राजपुर वार्ड में अनुसूचित जनजाति की संख्या 45.90 प्रतिशत और महिलाओं का आंकड़ा 51.96 फीसद है। राजपुर वार्ड एससी महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

पूरी तरह सरकारी ग्रांट पर निर्भर

पालमपुर इन दिनों नए-नए प्रोजेक्ट बनाकर डायरेक्टर प्रदेश नगर नियोजन के पास भेज रहा है, ताकि विकास कार्यों के लिए जल्द से जल्द फंडिंग आ सके। हालांकि प्रदेश सरकार की घोषणा के अनुसार नगर निगम पालमपुर में तीन साल तक कोई भी टैक्स नहीं लगाया गया है, जिसके तहत अब तीन साल तक विभिन्न करों से कोई इन्कम नहीं होगी। नगर निगम पालमपुर अब पूरी तरह सरकारी ग्रांट पर निर्भर है। प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों के लिए पहली किस्त के रूप में लगभग दो करोड़ 77 लाख रुपए की राशि नगर परिषद को प्रदान कर दी हैं। सफाई व्यवस्था के लिए 22 लाख के टेंडर लगाने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही नगर निगम के सभी इलाकों के लिए स्ट्रीट लाइट, पीने के पानी  व सेनीटेशन इत्यादि का एस्टीमेट बनाकर सरकार को भेज दिए गए हैं। बता दें कि तीन साल तक नगर निगम के इलाके में कोई कर नहीं लिया जाएगा, जिसके चलते नगर निगम पालमपुर के विकास के लिए 15वें वित्त आयोग व प्रदेश सरकार से धन मिलेगा, जिसमें कुछ टाइड ग्रांट्स होंगी। इसके अतिरिक्त अधिकारियों द्वारा उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि अनटाइड ग्रांट भी पालमपुर नगर निगम के लिए मिलेंगी। केंद्रीय बजट में इस बार हिमाचल के अर्बन लोकल बॉडीज के लिए लगभग साढे़ तीन हजार करोड़ के लगभग की ग्रांट दी गई है। इस ग्रांट से पालमपुर नगर निगम को भी काफी अधिक पैसा मिलने की उम्मीद है। पालमपुर को नगर निगम बनाने से नगर परिषद में रहने वाले लोगों के लिए भी तीन साल के लिए राहत मिल गई है, क्योंकि अब नगर परिषद के एरिया में भी तीन साल तक कोई भी कर नहीं लगेगा।

तरक्की तो निश्चित तौर पर करेंगे

राधा सूद, अध्यक्ष

नगर परिषद

दिहि: नगर परिषद से नगर निगम तक के बीच कौन सी नई मंजिलें पालमपुर को तय करनी होंगी?

राधा सूदः नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद पालमपुर उन्नति की ओर अग्रसर होगा। निश्चित तौर पर इलाका तरक्की करेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुविधाएं मिलेंगी। नगर परिषद से नगर निगम के बीच नई मंजिलें व नई राहें  तय करना चुनौती के समान है, लेकिन इसके लिए सरकार के सहयोग की बहुत आवश्यकता और अपेक्षा है। सरकार अच्छा खासा फंड उपलब्ध करवाने के साथ-साथ  उचित स्थायी उचित स्टाफ की नियुक्ति जल्द करे।

दिहिः किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

राधाः नगर परिषद के कार्यकाल में विकास के लिए धन की कमी आड़े आई है। अब ग्रामीण लोगों की अपेक्षाएं पूरी करना चुनौती भरा होगा। सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट व सीवरेज इत्यादि की व्यवस्था करना एक बड़ा चैलेंज है। हिमाचल में यह पहला ऐसा निगम है, जहां 80 फीसदी आबादी पंचायतों की शामिल की गई है। तीन नवगठित नगर निगमों में मंडी व सोलन में नगर परिषद का एरिया पहले ही बहुत बड़ा था और इन नगर निगम में बहुत कम पंचायतें नगर निगम से जुड़ी है। पालमपुर नगर निगम में अब ग्रामीण इलाके को शहर में बदलना एक चुनौती से कम नहीं है। मूलभूत सुविधाएं देने में अभी काफी समय लगेगा।

दिव्य हिमाचलः नगर परिषद किन-किन बातों व जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही थी?

राधाः पिछले दो साल में नगर परिषद पालमपुर में कई पद खाली पड़े थे। इस वजह से नगर परिषद के कई विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। दो साल से जूनियर इंजीनियर की पोस्ट खाली पड़ी थी, जिस कारण निर्माण कार्य सही ढंग से नहीं चल पाए। लगभग चार बार नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारियों को बदला गया है। नगर परिषद में स्थायी रूप से अधिकारी न होने के कारण विकास कार्यों में आंच आई है। हालांकि नगर परिषद में कोविड-19 की वजह से होटल रेस्टोरेंट्स के टैक्स माफ कर दिए थे। होटल व्यवसाइयों से कूड़ा-कचरा उठाने के चार्जेस भी नहीं लिए गए, अगर अब नगर निगम बनने के बाद सरकार का कितना सहयोग मिलेगा, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन इस बात की भी चुनौती रहेगी कि नगर परिषद में पहले जो साढ़े तीन लाख का सफाई व्यवस्था के लिए टेंडर लगाया जाता था।

अब यह टेंडर 22 लाख के करीब का होगा। इसके लिए धन कहां से आएगा, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है। नगर परिषद पालमपुर की आमदन सालाना लगभग डेढ़ करोड़ की थी और इतना ही पैसा कर्मचारियों व अधिकारियों की सैलरी में चला जाता था। जितने भी विकास कार्य हुए हैं, वे विधायक व सांसद निधि से या जिलाधीश कांगड़ा के फंड से करवाए गए हैं। नगर परिषद के पास रेवेन्यू जुटाने के साधन बहुत कम थे, लेकिन अगर अब सरकार को चाहिए कि नगर निगम पालमपुर को मंडी में सोलन से अधिक धन उपलब्ध करवाए, ताकि पालमपुर के अधिकतर ग्रामीण इलाके विकास के नए आयाम स्थापित कर सकें। नगर परिषद के विकास कार्य को अध्यक्ष के रूप में अंजाम देना एक चुनौती भरा कार्य था, लेकिन इस कार्य को पिछले पांच साल में अच्छी तरह निभाया गया है।

गंदगी ठिकाने लगाना बड़ा सवाल

पालमपुर नगर निगम में आबादी की बढ़ी संख्या के बीच रोजाना एकत्रित होने वाले कूड़े-कचरे को ठिकाने लगाना बड़ा सवाल होगा, हालांकि राहत की बात यह रहेगी कि प्रदेश को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाली आईमा पंचायत के साथ कूड़ा संयंत्र स्थापित कर चुकी घुग्गर पंचायत भी अब नगर निगम के दायरे में आ चुकी है। वहीं, लोहना पंचायत के सुरड़ गांव में नगर परिषद द्वारा एक करोड़ की लागत से स्थापित कूड़ा संयंत्र विवाद के चलते लंबे समय से बंद पड़ा है।

पंकज शर्मा हैं पहले आयुक्त

पंकज शर्मा को नगर निगम का पहला आयुक्त बनाया गया है, वह प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का काम भी संभाल रहे हैं। 2010 से प्रशासनिक सेवाओं में आए पंकज शर्मा अब तक विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। पालमपुर के एसडीएम का कार्यभार संभालने साथ पंकज शर्मा ज्वाइंट डायरेक्टर हायर एजुकेशन, एसी टू डीसी किन्नौर, पीओ किन्नौर, सचिव एसआई कमीशन, एसडीओ सिविल राजगढ़ और बीडीओ अंब व ऊना के तौर पर काम कर चुके हैं।

कभी जालंधर रियासत का हिस्सा हुआ करती थी

चाय नगरी पालमपुर कभी जालंधर रियासत का हिस्सा हुआ करता था। पालमपुर को उसका नाम पलम यानी पानी की बहुतायत वाले क्षेत्र से मिला। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान 1849 में डा. जेमसन ने अल्मोड़ा से लाकर यहां चाय के पौधे रोपित करवाकर पालमपुर को एक अलग पहचान दिलवाई, जिसके बाद पालमपुर को चाय नगरी का दर्जा मिला। 1888 में भवारना से बदलकर पालमपुर को तहसील मुख्यालय बनाया गया। 1904 में पालमपुर को नोटिफाइड एरिया कमेटी का दर्जा दिया गया। 1932 में स्माल टाउन कमेटी और 1948 में पालमपुर को नगर परिषद के तौर पर स्तरोन्नत किया गया। गठन के समय से नगर निगम में तबदील होने तक पालमपुर नगर परिषद की जनसंख्या साढ़े तीन हजार से चार हजार के बीच ही रही। कन्हैया लाल बुटेल नगर परिषद के पहले अध्यक्ष बने, जिसके बाद मेहर चंद, प्रकाश सैम्यूअल, भूप सिंह, बलवंत सिंह ठाकुर, शमा साहनी, अजीत बाघला और राधा सूद अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचे।

पालमपुर नगर परिषद में बरसों से रहने वाले और यहीं व्यवासाय करने वालों ने पालमपुर में कम होती जा रही जगह को देखते हुए आसपास की पंचायतों का रुख करना शुरू कर दिया और चंद कदमों की दूरी पर ही स्थित आईमा, घुग्गर, लोहना, बंदला और अन्य पंचायतों में अपना आशियाना बना लिया। इससे एक ओर पालमपुर नगर परिषद में बने उनके बरसों पुराने घर वीरान हो गए, जिनका उपयोग कई लोगों ने गोदाम की तरह करना शुरू कर दिया, वहीं दूसरी और नगर परिषद की सूची से भी उनका नाम हट गया। पालमपुर की आसपास की पंचायतों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था, जिसे देखते हुए करीब दो दशक पूर्व पालमपुर नगर परिषद क्षेत्र के विस्तार की सुगबुगाहट शुरू हुई। आसपास की पंचायतों के लोग विकास के लिए नगर परिषद का दायरा बढ़ाने की बात करने लगे, तो कई तरह की आशंकाओं के बीच इसे लेकर विरोध भी जताया जाने लगा।

बार-बार रुकता रहा विस्तार

राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं के कारण भी पालमपुर नगर परिषद विस्तार का काम बार-बार रुकता रहा। पूर्व में भाजपा के समय में इसे लेकर काम शुरू किया गया और बाकायदा साथ मिलाई जाने वाली करीब 13-14 पंचायतों का प्रारूप तैयार कर सरकार तक पहुंचाया गया। यहां भी राजनीति अपना रंग दिखाती रही और भाजपा सरकार के सत्ता से बाहर होते ही यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया।

जब दौरे पर आए वीरभद्र सिंह

कांग्रेस शासनकाल में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जब-जब पालमपुर दौरे पर आए, क्षेत्र के लोग इस मसले को उनके समक्ष रखते रहे, लेकिन स्थानीय स्तर पर नेताओं का पूरा सहयोग न मिलने से पालमपुर का क्षेत्र टस से मस नहीं हो सका। इस दौरान कई बार पालमपुर का नाम नगर निगम बनाए जाने वाले शहरों की सूची में सामने आता रहा, लेकिन वे बातें भी हवा में ही रही।

डेढ़ करोड़ सालाना कमाई

नगर परिषद पालमपुर के आर्थिक उपार्जन में मुख्य आय के स्रोत शहर में बनी दुकानों का किराया, हाउस टैक्स, पानी के बिल, पार्किंग फीस, विश्रामगृह तथा गारबेज फीस इत्यादि इन्कम के साधन हैं। हालांकि इन साधनों से वर्ष भर में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की इन्कम होती है, लेकिन यह सारा पैसा नगर परिषद के मुलाजिमों की तनख्वाह में चला जाता है।

नगर निगम क्षेत्र में आ चुके कई पर्यटन स्थल भी विकास के लिए विभिन्न मदों से मिलने वाली आर्थिक मदद से संवारे जा सकते हैं। नगर निगम क्षेत्र में काफी होटल और बैंक्वेट हॉल बन चुके हैं और पर्यटन उद्योग को भी लाभ मिलने की संभावना है। परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बतरा और कारगिल के प्रथम शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के निवास भी अब पालमपुर नगर निगम का हिस्सा हैं

—पंकज शर्मा, आयुक्त

अब अच्छे दिन आने वाले हैं

पालमपुर शहर के बाशिंदे वरिंदर सूद का कहना है कि नगर परिषद पालमपुर का दायरा बहुत कम था। नगर निगम द्वारा लगाए जाने वाले करों के लिए मानसिक रूप से हम लोग तैयार हैं, लेकिन नगर निगम सभी लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएं। पालमपुर के नेहरू चौक के आसपास कोई भी लेडीज टॉयलेट न होने के कारण महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब लगता है कि नगर निगम का गठन होने के बाद अधिक सुविधाएं लोगों को मिलेंगी। पालमपुर की अधिकतर जनसंख्या ग्रामीण इलाके में रहती थी। ऐसे लोगों को सीवरेज, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट, गारबेज इत्यादि की सुविधाएं नहीं मिल पाती थी, लेकिन नगर निगम के गठन के बाद ऐसी सुविधाएं लोगों को मिलेंगी।

ये सब हो, तो मानें

आईमा वार्ड के राकेश शर्मा कहते हैं कि लोग राजस्व देने को तैयार हैं। बशर्ते हर मूलभूत सुविधा लोगों को मिले। तभी हम कहेंगे कि नगर निगम का भविष्य उज्ज्वल है। अगर इसके बावजूद अगर नगर निगम इन सुविधाओं को देने में नाकामयाब रहती है, तो इसका कोई औचित्य नहीं रहता। नगर निगम के तमाम इलाके में नालियां पक्की होनी चाहिए। स्वच्छ पेयजल का इंतजाम होना चाहिए। साफ-सफाई, पार्किंग सुविधा, गारबेज व सीवरेज की व्यवस्था हर सूरत पर होनी चाहिए, तभी पालमपुर आदर्श नगर निगम की श्रेणी में आएगा।

सुनहरा ही होगा कल

शिक्षाविद रवि भारद्वाज का कहना है कि पालमपुर को नगर निगम बनाया गया है। विकास की दृष्टि से यह बहुत अच्छा फैसला है। खासकर ग्रामीण इलाके में नई-नई सुविधाएं मिलेंगी, जिसमें स्ट्रीट लाइट सफाई व्यवस्था सीवरेज की सुविधा के साथ-साथ यहां अन्य कई सुविधाएं मिलने की आस बंधी है, ऐसी सुविधाएं पहले पंचायत इलाके में नहीं मिलती रही हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी अब ग्रामीण इलाका भी सुरक्षित रहेगा। रात के समय लाइट जगमगाहट होने से चोरियों इत्यादि पर भी रोक लगेगी। कुल मिलाकर पालमपुर नगर निगम का भविष्य सुनहरा होगा।

लिखी जाएगी विकास की नई गाथा

राज सचदेवा कहते हैं कि नगर निगम पालमपुर का भविष्य अत्यंत सुनहरी है। आने वाले दिनों में पालमपुर की तरक्की होगी। पालमपुर की नगर परिषद दुनिया की सबसे छोटी नगर परिषद में शामिल थी। कई इलाके परिषद के अंदर नहीं थे, लेकिन अब पालमपुर का कृषि विश्वविद्यालय, विवेकानंद अस्पताल, कायाकल्प सीएसआईआर कॉम्प्लेक्स व अन्य कई बड़ी रेजिडेंशियल कॉलोनियों नगर निगम के दायरे में आ गई है। जहां विकास की गाथा लिखी जाएगी। नगर परिषद में शामिल ग्रामीण इलाके में भी स्ट्रीट लाइट्स के साथ-साथ पार्किंग की भी सुविधा लोगों को मिलेगी। अब पालमपुर का दायरा बढ़ने से बाहर के लोग भी जमीनें खरीद सकेंगे।