पीपल ही नहीं कॉफी भी छोड़ती है ऑक्सीजन

By: Jul 31st, 2016 12:01 am

घुमारवीं— पीपल के पेड़ की तरह कॉफी का पौधा भी 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। इस पर यूएसए की हारवर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञनिकों ने शोध किया है। इसका खुलासा कॉफी की फसल को बढ़ावा देने के लिए घुमारवीं पहुंचे भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ कामर्शियल कॉफी बोर्ड के डायरेक्टर डा. विक्रम शर्मा ने किया है। डा. विक्रम शर्मा के मुताबिक कॉफी का पौधा कामर्शियल ही नहीं, बल्कि पर्यावरण का भी मित्र है। अब तक विश्व भर की यूनिवर्सिटियों में हुए शोध में पीपल के पेड़ को ही 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला माना जाता था, लेकिन हाल ही में अमरीका की हारवर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कॉफी के पौधे पर शोध किया है। इसमें कॉफी का पौधा भी 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ने वाले पौधों की श्रेणी में शामिल हो गया है। डा. शर्मा ने बताया कि ग्रीन कॉफी बुढ़ापे को रोकने व मोटापे को कम करने में सार्थक साबित हुई है, जबकि कॉफी का प्रयोग डायबीटिक सहित अन्य घातक बीमारियों की रोकथाम के लिए होता है। नेचुरल तौर पर कॉफी की कामर्शियल खेती करने पर किसान अपनी आर्थिकी स्थिति सुदृढ़ कर सकता है। हिमाचल प्रदेश की लोअर बैल्ट के जिलों की जलवायु कॉफी उत्पादन में एकदम उपयुक्त है। कर्नाटक व असम राज्यों में उगाई जाने वाली कॉफी में फंगस आ जाती है, लेकिन सब-हिमालय रेंज के क्षेत्रों में उगाई जाने वाली कॉफी में कोई बीमारी नहीं आती है। कॉफी की कामर्शियल खेती को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार प्रयत्नशील है।

नॉर्थ जोन में पहली बार हींग की खेती

नॉर्थ जोन में पहली बार एवोबैड़ी व हींग की खेती इंट्रोड्यूज की जा रही है। आगामी वर्ष की शुरुआत तक ट्रायल के तौर पर यहां के किसानों को एवोबैड़ी व हींग के बीज उपलब्ध करवा दिए जाएंगे। एवोबैड़ी मैकिस्को देश में बहुतायात मिलता है, जबकि भारत में अभी तक तमिलनाडु व पुणे में ही कुछ किसान इसकी खेती कर रहे हैं। एवोबैड़ी अंतरराष्ट्रीय लेवल पर उगाई जाने वाली नकदी फसल है। इसकी भारतीय मंडियों में बहुत ज्यादा डिमांड है, जबकि हींग अफगानिस्तान व पाकिस्तान के बार्डर पर अधिक उगाया जाता है। इसे भी सब-हिमालय रेंज के क्षेत्रों में उगाया जाएगा। यहां काफी क्षेत्रों की जलवायु हींग के लिए उपयुक्त है।