ज्योतिष व्यापार न बने, शोध भी होते रहें

By: Jul 31st, 2016 12:01 am

धर्मशाला— पर्यटन नगरी धर्मशाला में चल रहे 57वें अखिल भारतीय सरस्वती ज्योतिष सम्मेलन में देश भर के ज्योषियों ने अपने विचार और शोध प्रस्तुत किए। समारोह का शुभारंभ ज्योति प्रज्वलन व सरस्वती वंदना से हुआ। शारदा ज्योतिष निकेतन के संचालक व राष्ट्रपति पदक विजेता पंडित लेखराज शर्मा ने ज्योतिष जिज्ञासुओं को भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर के नियमों, सार्थकता व सत्यता को बनाए रखने के लिए अपना सक्रिय व सार्थक सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई जातक किसी ज्योतिषी के पास अपनी समस्या लेकर जाता है, वह उस समय उसका शोषण नहीं मार्गदर्शन करे। उन्होंने कहा कि ज्योतिष को शोध का विषय बनाए जाने की आवश्यकता है न कि व्यापार का। वहीं सेमिनार में पर्यटन विकास परिषद के उपाध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने अध्यक्ष के रूप में शिरकत की। श्री मनकोटिया ने मंच को अपने स्वेच्छा फंड से एक लाख आर्थिक सहयोग देने की भी घोषणा की। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता संजय शर्मा प्रवक्ता एचपीसीए ने की। इस अवसर पर मंच के संस्थापक अध्यक्ष पंडित राजीव शर्मा, संरक्षक विक्रांत शर्मा, मोहन भाई पटेल अहमदाबाद, प्रो. डा. के दिवाकरन कोच्चि, मुरली देवराकुंडा चेन्नई, अजय भांवी दिल्ली, अक्षय शर्मा मोगा, प्रीतम भारद्वाज धर्मपुर, विपिन शर्मा जवाली व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस दौरान शियाकांत दुवे, विशाल शर्मा, दिलीप कुमार, दीपक कुमार, गौतम भोला नाथ, कैलाश चमोली, सुनील कुमार, आशुतोष शर्मा, पुनीत भोला, हरीश मलिक, पुष्पेंद्र कुमावत, त्रिशला सेठ, कृष्ण देव आदि ने ज्योतिषीय विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। सम्मेलन के दौरान स्व. पंडित सूर्यप्रकाश त्रिपाठी के चित्र पर माला अर्पण व दो मिनट का मौन रखके श्रद्धांजलि अर्पित की गई।