हिमाचल तक मोदी सरकार

By: May 26th, 2015 12:15 am

भाजपा के कसमें-वादे और कसौटियां अपनी पहली वर्षगांठ में कितनी मुकम्मल और असरदार, यह हिमाचल तक फैसला होगा। सरकार का मूल्यांकन इसको मिले जनादेश के अनुपात में देखा जाएगा और इस हिसाब से हिमाचल के केंद्र से नए रिश्ते जुड़े हैं। केंद्र सरकार में हिमाचल भाजपा की सौ फीसदी सफलता का मुकाम एक मंत्री के रूप में, जगत प्रकाश नड्डा की ताजपोशी में हासिल हो जाता है और जिसका असर भी सामने है। प्रदेश के हिस्से में आईआईएम और एम्स की बुनियाद से आशाओं के नए शिखर स्थापित हुए, तो नीति आयोग की तरफ बढ़ते एहसास से सीधे केंद्रीय कर आबंटन से आर्थिक संसाधनों की खेप बढ़ी है। बेशक राज्य में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन केंद्र के व्यवहार से टीम इंडिया की भावना हिमाचल में जगी है। रेलवे बजट के बंद दरवाजे पर दस्तक लगाते, सांसद अनुराग ठाकुर ने यूं तो सर्वेक्षण की मंजिल हमीरपुर तक पहुंचा दी, लेकिन कारवां बनाने के लिए अभी मेहनत की जरूरत है। एक साल की मोदी सरकार ने हिमाचली सांसदों का श्रम देखा है इसलिए इनके प्रदर्शन का विश्लेषण भी होगा। सरकारों का गैर राजनीतिक आचरण ही तय करेगा कि हिमाचल और केंद्र के बीच संबंध कितने पुख्ता हुए। कम से कम एम्स और आईआईएम की भूमि चयन प्रक्रिया के बीच तो यही मालूम होता है कि बाजी जीतने के बजाय काम को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिशें दोनों तरफ से हुई हैं। आश्चर्य यह कि प्रक्रिया के प्रारूप में ऐसी तेजी के बावजूद हिमाचल के केंद्रीय विश्वविद्यालय की मिलकीयत पर भवें तनी हुई हैं। हालांकि राज्य सरकार ने तमाम आपत्तियों को स्वीकार करते हुए अब एक नए भूखंड पर केंद्रीय विश्वविद्यालय का नक्शा उकेरा है और ऐसी आशा है कि एम्स-आईआईएम की तर्ज पर यह शिक्षण संस्थान भी अपने स्वतंत्र कदम आगे बढ़ाएगा। केंद्र सरकार ने हिमाचल के नाम कई उच्च राष्ट्रीय मार्ग लिखकर सबसे बड़ा पैगाम भले ही दिया हो, लेकिन मोदी सरकार की हिमालय भक्ति और पर्वतीय प्रतिष्ठा के प्रति न्याय की कई सौगातें बाकी हैं। मानसरोवर यात्रा के पड़ाव में हिमाचल की शिनाख्त अगर हो जाए तो पर्वतीय परंपराओं में हिमालय का सिर गर्व से ऊंचा होगा। आज भी हिमाचल से बेहतर जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों को केंद्र का दुलार मिलता है, जबकि विशेष राज्य की श्रेणी में हमारे कई पर कतर दिए गए। हिमाचल को उस एहसास की प्रतीक्षा है, जो सुजानपुर रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिव्यक्त किया था। वह शृंगार अभी बाकी है, जिससे भाजपाई रूप में हिमाचली स्वावलंबन और प्रगति स्पष्ट होगी। देश-विदेश में भ्रमण पर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेताबी से हिमाचल में प्रतीक्षा हो रही है। सदियों से हिमालय पुत्र के रूप में हिमाचल ने कई तरह की तपश्चर्या के बाद अपने वातावरण की निर्मलता में देश और संस्कृति को संबोधित किया। विकास के राष्ट्रीय पैमानों के बीच हिमाचल का राजनीतिक कद भले ही छोटा हो, लेकिन देश के लिए कुर्बानियों का सबसे बड़ा इतिहास, राष्ट्र के लिए बड़े बांधों में डूबने का अंदाज, पर्यावरण बचाने के लिए प्रतिबंध और नदियों के मार्फत जीने का एहसास देने वाले इस प्रदेश का हिसाब बहुत बड़ा है। विडंबना यह रही कि विस्थापन का दर्द आज भी भाखड़ा-पौंग बांधों के किनारे सिसकता है। फौजी रुतबे की तमाम सलामियों के बीच हिमाचली पूर्व सैनिक अपनी पेंशन विसंगतियों पर आहत हैं। गौरव के हिमाचली पक्ष को केंद्र की ईमानदारी का सबूत अभी बाकी है। कभी अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस तरह औद्योगिक पैकेज देकर हमें अपनी आर्थिक जमीन पर चलना सिखाया, उसी तरह रेलवे पैकेज के मार्फत इस प्रदेश को न्यायिक अधिकार चाहिए। हिमाचल को अपना युग चाहिए, पर्वतीय नीतियां चाहिएं और इन्हीं अपेक्षाओं के साथ पहली वर्षगांठ से आगे निकलने का इंतजार रहेगा।