विटामिन-सी से भरपूर है जंगली रास्पबेरी

By: Jan 28th, 2014 12:15 am

जंगली फल मानव सभ्यता एवं आधुनिक बागबानी के उदय होने से पहले मनुष्य आहार का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। जंगली फलों की खाने योग्य प्रजातियां पश्चिमोत्तर हिमालय में बहुतायत रूप में पाई जाती हैं। जंगली फल प्राकृति रूप में काफी मात्रा में उपलब्ध होते हैं तथा स्थानीय लोगों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। वैसे तो पश्चिमोत्तर हिमालय क्षेत्र में कई प्रकार के खाने योग्य जंगली फल पौधे पाए जाते हैं, परंतु जंगली रास्पबेरी पीले तथा काले रंग वाला अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण फल है।  ‘गोल्डन एवरग्रीन रास्पबेरी’ जिसे अंग्रेजी भाषा में Rubus ellipticus के नाम से जाना जाता है, स्थानीय लोग इसे आखें, हीरे तथा हिन्यूरे इत्यादि के नामों से जानते हैं। यह बहुत ही स्वादिष्ट फल है, जो कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर तथा उत्तराखंड के मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों में पाया जाता है। यह फल हिमालय क्षेत्र में विशेषकर समशीतोष्ण जलवायु में समुद्रतल से 600 से 2000 मीटर तक तथा पश्चिम में सिक्किम, भूटान,  पहाडि़यों, बर्मा तथा यूनान प्रांत तक फैला हुआ है। इस फल को स्थानीय लोगों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है तथा कई स्थानों में ग्रामीण ‘हाटों’ में इसे बेचा भी जाता है। इस फल में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी तथा दूसरे कई महत्त्वपूर्ण खनिज जैसे फासफोरस, पोटाशियम, कैल्शियम तथा लौह तत्त्व आदि मौजूद होते हैं। इस फल का रंग आकर्षक एवं उत्तम सुगंध लिए हुए होता है,जिसे स्क्वैश, जैम  इत्यादि बनाने के लिए संरक्षित किया जा सकता है। वैसे भी बाजार में आज इसका जैम एक लोकप्रिय उत्पाद के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है। रास्पबेरी का दोहन वनस्पति शास्त्रियों व आयुर्वेदों द्वारा तो काफी मात्रा में किया गया, लेकिन फल विज्ञान की दृष्टि से इस फल को जंगली अवस्था से बागबानी की अवस्था में लाना अभी तक बहुत दूर की बात है। हालांकि इस फल का मानव आहार में बहुत अधिक महत्त्व है, लेकिन क्रमबद्ध तरीके से अनुसंधान न हो सकने के कारण इस फल का पूर्ण रूप से दोहन एवं विकास नहीं हो पाया है।

दिनेश सिंह, कृष्ण कुमार, विकास कुमार शर्मा एवं नारायण सिंह ठाकुर