महंगा पड़ेगा मास्टर स्ट्रोक

By: Sep 12th, 2012 12:08 am

शिमला — शिमला में सौ साल पहले से रह रहे लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक देने के मामले को बेशक भाजपा मास्टर स्ट्रोक समझ रही हो मगर ये भी सच है कि चुनाव घोषणापत्र के वायदे को भाजपा पूरा नहीं कर पाई है। चुनाव में भाजपा ने घोषणा की थी कि बाजार वार्ड के लोगों को मालिकाना हक बिना कुछ लिए दिया जाएगा मगर अब इसपर शर्तें लगा दी है जिसे भुनाने के लिए कांग्रेस ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में भाजपा सरकार ने शिमला के बाजार वार्ड के हजारों लोगों को राहत देने की कोशिश की है जिसे भाजपा अपना मास्टर स्ट्रोक मान रही है। बाजार वार्ड के लोग पिछले साढ़े चार साल से लगातार मांग उठा रहे थे कि उन्हें मालिकाना हक दिया जाए और वह भी बिना किसी शर्त के। अब जो आदेश हुए हैं उसके मुताबिक लोगों को क्षेत्रफल के आधार पर पैसा देना होगा और उससे पहले धारा 118 के तहत मंजूरी लेनी होगी जिसे लेने में ही उनका पसीना निकल जाएगा ये तय है। सूत्रों की मानें तो ये फार्मूला पिछली वीरभद्र सरकार ने भी सुझाया था, लेकिन तब भाजपा ने इसका विरोध किया था। ऐसे में अब भाजपा ने उसी फार्मूले पर लोगों को राहत देने की बात कही है। ये मुद्दा शहर के विधायक सुरेश भारद्वाज ने उठाया है और अपनी तरफ से लोगों को राहत भी दिलाई है, लेकिन इससे किस स्तर तक लोगों को राहत मिलेगी ये भविष्य में साफ होगा। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने पलटवार कर दिया है और कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने घोषणा पत्र के विपरीत काम किया है। कांग्रेस नेताओं प्रदीप सिंह भुज्जा, अरुण शर्मा, संजीव कुठियाला, जितेंद्र चौधरी का कहना है कि भाजपा ने मुफ्त में सभी लोगों को मालिकाना हक देने की बात कही थी। अब जो निर्णय लिया गया है वो बाजार वार्ड के लोगों के साथ धोखा है। उनका कहना है कि बाजार वार्ड में 50-100 साल से पहले से लोग रह रहे हैं जो उनपर धारा 118 की शर्त लगाने की क्या जरूरत थी।  उन्होंने शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज को भी इस मुद्दे पर घेरा और पूछा है कि वह बताएं जब पैसा नहीं लेने की बात की थी तो अब पैसा लेने की शर्त कहां से लग गई। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार की करनी और कथनी में अंतर है।