अल्ट्रासाउंड में पिसीं गर्भवती

By: Nov 2nd, 2010 11:26 pm

वीरेन कुमार, टीएमसी

स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों की मौज में गर्भवती महिलाओं को पिसना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड में भरा जाने वाला महत्त्वपूर्ण फार्म नंबर – एफ मजाक बनकर रह गया है। प्रदेश में पीएनडीटी एक्ट के तहत भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने को राज्य और जिला भर में अथारिटी नियुक्त की गई है। नियमों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में रेडियोलाजिस्ट, माइकोनोलिजिस्ट एवं प्रशिक्षित ही इस फार्म को भर सकते हैं। इसकी अनुमति के बाद ही गर्भवती अल्ट्रासाउंड करवा सकती हैं। फार्म नंबर- एफ में गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड के दौरान पूरा रिकार्ड रखा जाता है। हत्या को रोकने में सबसे बड़ा हथियार माने जाने वाले फार्म नंबर – एफ के लिए स्वास्थ्य महकमे में जंग छिड़ गई है। सूत्रों की मानें, तो इस काम का जिम्मा संभालने वाले रेडियोलॉजिस्ट ने फार्म भरने से ही इनकार कर दिया है। विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं कि अस्पताल में चिकित्सक और दूसरे स्टाफ के लोग फार्म नंबर -एफ भरेंगे, जबकि इसे अटेस्टेड रेडियोलॉजिस्ट करेंगे। अजीब प्रक्रिया का खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड करवाने आई महिलाएं फार्म को भरवाने और अटेस्टेशन के लिए चक्कर काट रही हैं। ऊंची पहुंच रखने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस व्यवस्था में बदलाव करवा दिया है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डा. विनोद पाठक  इससे साफ इनकार करते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था ठीकचल रही है। इससे किसी को भी परेशानी नहीं होनी चाहिए।